बाघ की खाल तस्करी का भंडाफोड़: खरीदार बनकर वन विभाग ने दबोचे तीन तस्कर

सूरजपुर। वन विभाग ने वाइल्ड क्राइम ब्यूरो की सूचना पर कार्रवाई करते हुए तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है. विभाग को सूचना मिली थी कि इलाके में बाघ की खाल और दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों का सौदा होने वाला है. इसके बाद वन विभाग ने दो टीमों का गठन किया. प्लानिंग ऐसी बनाई गई कि टीम के कुछ सदस्य खुद खरीदार बनकर तस्करों के संपर्क में पहुंचे.

जैसे ही सौदा तय हुआ और तस्कर कथित तौर पर बाघ की खाल लेकर पहुंचे, वन विभाग की टीम ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया. तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से बाघ की खाल, दुर्लभ पैंगोलिन के शेल और शिकार में इस्तेमाल होने वाले हथियार बरामद किए गए. अधिकारियों के मुताबिक, बरामद बाघ की खाल करीब 5 से 6 महीने पुरानी है. आशंका है कि इसे ऊंची कीमत पर बेचने की तैयारी थी.

वन विभाग का कहना है कि इसके पीछे वन्यजीव तस्करी का बड़ा नेटवर्क हो सकता है. अब जांच इस बात की हो रही है कि बाघ का शिकार कहां हुआ, खाल किन रास्तों से यहां तक पहुंची और इसे आखिर किसे बेचा जाना था. साथ ही तस्करों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि पूरे सिंडिकेट तक पहुंचा जा सके. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश वाइल्ड क्राइम ब्यूरो और स्थानीय वन विभाग के संयुक्त अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है. उनका दावा है कि क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार और तस्करी पर रोक लगाने के लिए आगे भी इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे. बाघ और पैंगोलिन जैसे वन्यजीव भारत में कानूनी संरक्षण प्राप्त प्रजातियां हैं. इनके शिकार, अंगों की खरीद-फरोख्त या तस्करी से जुड़े मामलों में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है.

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