Kangana Ranaut Vs Sharmila Tagore On Vande Mataram Controversy: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ पर सियासी संग्राम जारी है। संसद से पास होने और कानून बनने के बाद भी कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में कांग्रेस ने इसके दो छंद ही गाने का प्रस्ताव पास किया है। इसे बीजेपी और कांग्रेस में जुबानी जंग जारी है। अब वंदे भारत पर शर्मिला टैगोर और कंगना रनौत भिड़ गईं हैं। 70-80 के दशक की दिग्गज बॉलीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम के दो ही पैरा गाने की वकालत की। इसे लेकर कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर पर निशाना साधते हुए हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर निकलने की नसहीत दे डाली।
दरअसल शर्मिला टैगोर ने राष्ट्रगीत के बाद के छंदों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों का उल्लेख करते हुए केवल शुरुआती दो छंदों को ही बनाए रखने का सुझाव दिया था। उन्होंने तर्क दिया था कि एक ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए इन छंदों को स्वीकार करना कठिन हो सकता है।

शर्मिला टैगोर के इस बयान वाले वीडियो को अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा करते हुए कंगना रनौत ने निशाना साधा। बीजेपी सांसद ने लिखा- मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है। किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है।
स्वामी विवेकानंद का दिया हवाला
कंगना ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए अपनी बात रखी। कंगना ने आगे लिखा-स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए जिनकी मांसपेशियां लोहे की, हड्डियां स्टील की और नसों में बिजली दौड़ती हो। वे मौसम का हाल नहीं बता रहे थे, बल्कि देश की युवा शक्ति का आह्वान कर रहे थे। कृपया इस हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आएं। यदि हम एक ही ईश्वर पर विश्वास करते हैं, तब भी डॉक्टर ताकत को ‘शक्ति’ ही कहते हैं। आइए हम सब एक-दूसरे को अपना समझकर गले लगाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और मुझे आपके उस हग से कोई आपत्ति नहीं है, जो आप हमेशा मुझे देती हैं।
कंगना बोलीं- हिंदू-मुस्लिम से बाहर आओ
एक्ट्रेस ने आगे लिखा कि ‘प्लीज हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आओ, भले ही हम एक ही ईश्वर में विश्वास करते हों। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और आपसे कसकर गले मिलना भी पसंद करूंगी, ठीक वैसे ही जैसे आप हमेशा मिलती हैं।
क्या है पूरा मामला?
शर्मिला की यह टिप्पणी कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के उस फैसले के एक दिन बाद आई है जिसमें उसने 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का निर्णय लिया था। इस प्रस्ताव के तहत कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाएंगे। 15 अगस्त को कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान भी एक विवाद खड़ा हो गया था, जब बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की संसदीय अध्यक्ष सोनिया गांधी पर ‘वंदे मातरम’ गाए जाने के दौरान बातचीत करने का आरोप लगाया था। बीजेपी ने माफी की मांग की थी, जबकि कांग्रेस ने इस घटना को महज एक संयोग बताया था। वहीं इसके अगले ही दिन गोवा कांग्रेस की बैठक में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के दो पैरा ही गाया गया। इस दौरान मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद थे। इसके अगले दिन कांग्रेस ने वर्किंग कमेटी की बैठक में 2 पैरा गाने का प्रस्ताव पास किया। इसे लेकर बीजेपी कांग्रेस पर आक्रमक है।

