पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में बड़ा एक्शन, इंस्पेक्टर समेत 7 पुलिसकर्मी सस्पेंड…

कौशाम्बी. पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शहबाजी गांव में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. आईजी रेंज प्रयागराज अजय मिश्र ने घटना में प्रथमदृष्टया पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद एक इंस्पेक्टर समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

लाइसेंस पहले ही हो चुका था निलंबित

पुलिस के मुताबिक, पटाखा फैक्ट्री संचालक नौशाद अली पुत्र निजामुद्दीन निवासी महमूदपुर मनौरी के नाम पटाखा निर्माण का लाइसेंस 31 मार्च 2026 तक जारी था. हालांकि, अनियमितताओं के चलते यह लाइसेंस 4 अप्रैल 2024 को ही निलंबित कर दिया गया था. इसके बावजूद आरोपी पर आरोप है कि उसने अवैध तरीके से पटाखों का निर्माण और भंडारण जारी रखा.

पहले भी जेल जा चुका था फैक्ट्री संचालक

पुलिस के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष ने 9 अक्टूबर 2024 को आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा था. जेल से बाहर आने के बाद कथित तौर पर उसने दोबारा अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण शुरू कर दिया. 31 अगस्त 2026 को इसी फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई.

लापरवाही पर सात पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

घटना के बाद पिपरी थाने में छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 288 तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 4, 5 और 9बी के तहत कार्रवाई की गई है. वहीं, आईजी की जांच में सामने आया कि फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही निलंबित था और संचालक के खिलाफ पूर्व में भी कार्रवाई हो चुकी थी. इसके बावजूद अवैध गतिविधि रोकने में पुलिस स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई.

इंस्पेक्टर समेत ये सात पुलिसकर्मी निलंबित

निलंबित पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर शिवचरण राम के अलावा सब इंस्पेक्टर विकास सिंह, विनय सिंह, अजीत कुमार सिंह, अभिषेक गुप्ता, मनीष पाल और उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, ये अधिकारी अलग-अलग समय में पिपरी थाने के प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष और चायल चौकी प्रभारी के पद पर तैनात रहे थे.

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है. अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद फैक्ट्री में अवैध गतिविधियां कैसे चलती रहीं और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई.

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