चंडीगढ़। सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान एक वैवाहिक विवाद ने मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। मामला जब जजों के सामने पहुंचा तो काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती रही। विवाद के बीच सबसे बड़ी चिंता नाबालिग बच्चे के भविष्य को लेकर सामने आई, जिसके बाद अदालत ने दंपती को रिश्ते और बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए समाधान की राह तलाशने के लिए समझाया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत मोहन शर्मा, कार्यवाहक जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिंदर सिद्धू समेत अन्य न्यायिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से विस्तार से बातचीत की। अदालत की ओर से उन्हें समझाया गया कि पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद का असर केवल दोनों के रिश्ते तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका सबसे गहरा प्रभाव बच्चों पर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चे के भविष्य और उसके हित को प्राथमिकता देना जरूरी है।
काफी देर तक चली बातचीत के बाद दंपती ने विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए कुछ और वक्त मांगा। अदालत ने भी दोनों पक्षों को जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय आपसी बातचीत के जरिए स्थायी समाधान खोजने की सलाह दी। इस दौरान अदालत का माहौल भावुक नजर आया और बच्चे के भविष्य को लेकर दोनों पक्षों को रिश्ते पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित किया गया।
30 हजार से ज्यादा मामलों का निपटारा
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जिला अदालत परिसर में कुल 14 बेंच गठित की गई थीं। इन बेंचों के समक्ष आपराधिक समझौता योग्य मामलों के अलावा चेक बाउंस, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, मध्यस्थता और दीवानी मामलों सहित ट्रैफिक चालान से जुड़े प्रकरण भी रखे गए।
लोक अदालत के दौरान 30,145 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। नियमित बेंचों और स्थायी लोक अदालत के माध्यम से 20,230 प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान किया गया। इसके अलावा राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोग तथा डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों को भी समझौते के जरिए निपटाया गया।
अधिकारियों ने कहा कि लोक अदालत विवादों के त्वरित और कम खर्च में समाधान का प्रभावी माध्यम है। लोगों से अपील की गई कि वे लंबे समय तक मुकदमेबाजी में उलझने के बजाय आपसी सहमति और बातचीत के जरिए विवादों का समाधान तलाशें और लोक अदालत की सुविधा का लाभ उठाएं।

