लाइफ स्टाइल। गणपति उत्सव चल रहा है और सभी तरफ़ खुशियों का माहौल है।इस दौरान घर में पूजा-पाठ के साथ फूल, पत्तियां, दूर्वा और दूसरी प्राकृतिक पूजा सामग्री भी बड़ी मात्रा में इकट्ठा हो जाती है। पूजा पूरी होने के बाद अक्सर इन चीजों को कूड़ेदान में डाल दिया जाता है या लोग इन्हें जलस्रोतों में विसर्जित कर देते हैं। हालांकि, पूजा में इस्तेमाल हुई प्राकृतिक सामग्री को सीधे फेंकने के बजाय कई आसान तरीकों से दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
फूल और पत्तियां जैविक सामग्री हैं, इसलिए इनसे खाद तैयार करने से लेकर घर की सजावट और प्राकृतिक रंग बनाने तक कई काम लिए जा सकते हैं। इससे घर में निकलने वाला जैविक कचरा कम करने में भी मदद मिलती है। पूजा सामग्री को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले उसमें लगी प्लास्टिक, धागे, तार, फोम, रिबन और दूसरी गैर-जैविक सजावटी चीजों को अलग कर दें।आइए जानते हैं पूजा के बाद बचे फूल-पत्तियों को किस तरह उपयोग में लाया जा सकता है।
फूल-पत्तियों से बनाएं खाद
बचे हुए फूल, पत्तियां और दूर्वा घर में कंपोस्ट बनाने के काम आ सकते हैं। इसके लिए फूल-पत्तियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सूखे पत्तों और दूसरे उपयुक्त जैविक कचरे के साथ कंपोस्ट बिन में डालें। इसमें नमी का संतुलन बनाए रखें और समय-समय पर मिश्रण को पलटते रहें।कुछ समय बाद यही सामग्री जैविक खाद में बदलने लगेगी। तैयार खाद को गमलों या बगीचे की मिट्टी में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सूखे फूलों से करें घर की सजावट
अगर पूजा के फूल बहुत ज्यादा खराब या सड़े हुए नहीं हैं, तो उन्हें फेंकने के बजाय छांव में अच्छी तरह सुखाया जा सकता है। फूलों की पंखुड़ियों को पूरी तरह सूखने के बाद कांच की बोतल, सजावटी कटोरी या किसी अन्य डेकोरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है।सूखे फूलों को दूसरी प्राकृतिक सामग्री के साथ मिलाकर घर की सजावट के लिए आकर्षक मिश्रण भी तैयार किया जा सकता है। ध्यान रखें कि फूल पूरी तरह सूखे हों, क्योंकि नमी रहने पर बंद कंटेनर में फफूंद लग सकती है।
फूलों से बनाएं प्राकृतिक रंग
फूलों की पंखुड़ियों से प्राकृतिक रंग भी तैयार किया जा सकता है। खासतौर पर गेंदे जैसे फूलों की साफ पंखुड़ियों को पानी में उबालकर रंगीन पानी तैयार किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल कागज, क्राफ्ट या सजावटी कला-काम में किया जा सकता है।
इसके लिए ऐसे फूलों का इस्तेमाल करें जिन पर रासायनिक रंग, कीटनाशक या अन्य अनुपयुक्त पदार्थ का इस्तेमाल न हुआ हो। त्वचा या खाने से जुड़े इस्तेमाल के लिए किसी भी फूल से बना रंग इस्तेमाल करने से पहले उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
ताजे फूलों से दोबारा करें सजावट
अगर पूजा के बाद कुछ फूल अभी भी ताजे और साफ हैं, तो उन्हें तुरंत फेंकने की जरूरत नहीं है। इनसे छोटी माला, पूजा की थाली की सजावट या घर के मंदिर के लिए प्राकृतिक डेकोरेशन तैयार किया जा सकता है।
हालांकि, बहुत पुराने, मुरझाए या खराब हो चुके फूलों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल करने के बजाय कंपोस्ट में डालना बेहतर विकल्प है। साथ ही, फूलों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना स्थानीय धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार ही करें।
बड़ी मात्रा में फूल हों तो अलग करें
अगर गणपति उत्सव के बाद आपके घर या सोसायटी में बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री जमा हो गई है, तो उसे सामान्य कूड़े के साथ मिलाने के बजाय अलग रखें। फूलों और पत्तियों को जैविक कचरे के रूप में कंपोस्टिंग के लिए दिया जा सकता है।
कई शहरों में स्थानीय निकाय और कुछ संस्थाएं पूजा के फूलों के लिए अलग संग्रह अभियान भी चलाती हैं। अगर आपके इलाके में ऐसी सुविधा उपलब्ध हो, तो पूजा सामग्री वहां देना बेहतर विकल्प हो सकता है।
पूजा के फूल-पत्तियां कचरा नहीं हैं।थोड़ी-सी सावधानी और समझदारी से इन्हें खाद, सजावट या क्राफ्ट के काम में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे घर का कचरा कम होगा और पूजा के बाद प्राकृतिक सामग्री का निपटारा भी ज्यादा जिम्मेदारी से किया जा सकेगा।

