Abhijeet Dipke lashes out at PM Modi: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर और नेता अभिजीत दीपके नागपुर से दिल्ली पहुंच गए हैं। सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की जेल की सजा मिलने के बाद अभिजीत दीपके दिल्ली पहुंचे। सीजेपी नेता अभिजीत दीपके ने फ्लाइट से उतरते ही पीएम मोदी पर निशाना साधा। अभिजीत दीपके ने कहा कि मैं नरेंद्र मोदी से कहना चाहता हूं कि क्या आप डरपोक तानाशाह हो। ऐसा हमारे ऊपर तब हुआ था जब अंग्रेजों का शासन था।
बता दें कि प्रतिबंधित दिल्ली जंतर-मंतर में बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसनकर प्रदर्शन करने के कारण कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) नेता सौरव दास-आशुतोष रांका को 5 दिन की जेल की सजा मिली है। जबकि अजिंक्य शिंदे को एक साल का बॉन्ड भरवाने के बाद रिहा कर दिया गया है।
इसपर अभिजीत दीपके ने गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने सोशल मीडिा एक्स पर लिखा- मुझे आखिरी बार भारतीयों के सार्वजनिक स्थान पर तिरंगा लहराने के कारण जेल भेजे जाने की घटना औपनिवेशिक शासन के दौरान की याद है, जब विदेशी शासक हमें कमतर समझते थे और हमारे साथ वैसा ही व्यवहार करते थे। उन्होंने कहा क्या इस देश में तिरंगा फहराना जुर्म है? आशुतोष और सौरव को पांच दिन के लिए जेल भेजा गया है। क्यों? क्योंकि वे जंतर-मंतर गए और तिरंगा फहराया। पिछली बार ऐसा तब हुआ था जब हम पर अंग्रेजों का राज था।
वहीं सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने लिखा, सौरव और आशुतोष को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अजिंक्य को पर्सनल बॉन्ड पर रिहा किया गया है। गिरफ्तारी के कारण वही थे। पता चला है कि SEM का प्रदर्शनकारियों को सजा देने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। कायर सरकार
आपातकाल लगाने का दिया चैलेंज
इससे पहले एक अन्य ट्वीट में भी दीपके ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री मोदी को आपातकाल लगाने का चैलेंज देते हुए लिखा- आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उनकी गलती? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना. थोड़ी हिम्मत दिखाइए, नरेंद्र मोदी। अगर आप विरोध की आवाज को दबाने के लिए इतने ही पक्के इरादे वाले हैं, तो इन कायरतापूर्ण तरीकों की आड़ लेने के बजाय आधिकारिक तौर पर आपातकाल (Emergency) घोषित करने की हिम्मत दिखाइए।
सीजेपी ने शेयर किया पोस्ट
सीजेपी ने आशुतोष और सौरव की हाथ में तिरंगा लिए फोटो शेयर की है. इसके साथ लिखा, जब अन्याय ही कानून बन जाए, तो उसका विरोध करना कर्तव्य बन जाता है!

