PM Modi Foreign Visit Records Will Not Be Public: पीएम मोदी की विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड पब्लिक्ली (सार्वजनिक) नहीं होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को रद्द करते हुए पीएम मोदी की विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि यह जानकारी देने से नेशनल सिक्योरिटी खतरे में पड़ सकती है।
दरअसल केंद्रीय सूचना आयोग ने भारतीय वायु सेना को निर्देश दिया गया था कि वह सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड का खुलासा करे।
मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि RTI एप्लीकेंट, रिटायर्ड कमोडोर लोकेश बत्रा ने स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स (SFR) पार्ट I और पार्ट II के बारे में डिटेल्स मांगी थीं। जिसमें एयरक्राफ्ट, एयरक्रू, पूरे एन्टोरेज की डिटेल्स, और PM के साथ ट्रैवल करने वाले सभी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के लोगों के नाम शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि यह जानकारी देने से नेशनल सिक्योरिटी खतरे में पड़ सकती है। साथ ही PM की जान और फिजिकल सेफ्टी खतरे में पड़ सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि नेशनल सिक्योरिटी और प्रधानमंत्री के साथ मौजूद सिक्योरिटी सिस्टम पर इस तरह के खुलासे के संभावित असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा, ऐसा असेसमेंट मुख्य रूप से उन एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है जिन्हें प्रधानमंत्री की सिक्योरिटी पक्की करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है और यह कोर्ट काबिल सिक्योरिटी एजेंसियों के असेसमेंट की जगह अपना असेसमेंट नहीं कर सकता।

RTI एप्लीकेशन से खुलासा
आपको बता दें कि यह मामला जून 2018 में रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के बत्रा की फाइल की गई एक RTI एप्लीकेशन से सामने आया है। उन्होंने अप्रैल 2013 से जून 2018 के बीच इंडियन एयर फोर्स के एयरक्राफ्ट से भारतीय प्रधानमंत्रियों के विदेश दौरों की डिटेल्स मांगी थीं। एयर फोर्स ने कुछ दौरों के बारे में जानकारी तो दी, लेकिन SFR पार्ट-I और पार्ट-II की डिटेल्स बताने से मना कर दिया था। फोर्स के सेंट्रल पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (CPIO) ने सिक्योरिटी की चिंताओं का हवाला दिया और फिड्यूशरी कैपेसिटी में रखी गई जानकारी के लिए छूट का भी हवाला दिया। CIC ने एयर फोर्स को सिक्योरिटी वालों के नाम हटाने के बाद मौजूद और जरूरी SFR-II रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी देने का निर्देश दिया ता। इस वजह से CPIO को हाईकोर्ट जाना पड़ा।
कोर्ट ने ऑर्डर किया रद्द
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि सिर्फ यह बात कि PM के विदेश दौरों पर सरकारी पैसे खर्च किए गए हैं, अपने आप में ऐसी जानकारी के खुलासे को सही नहीं ठहराती जिससे ऐसे दौरों के लिए किए गए सिक्योरिटी इंतजामों से समझौता हो सकता है। कोर्ट ने यह नतीजा निकाला कि CIC ने SFR-II के खुलासे का निर्देश देकर गलती की थी और इसलिए, ऑर्डर रद्द कर दिया।

