बीमा कंपनी को 6% ब्याज सहित देना होगा 20 लाख का मुआवजा, राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम का फैसला

रायपुर। पति की सड़क हादसे में मौत हुई। परिवार को सहारा देने के लिए 20 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा था, लेकिन बीमा कंपनी ने राशि देने से इन्कार कर दिया। महिला जिला उपभोक्ता आयोग पहुंची तो वहां भी निराशा हाथ लगी। राज्य आयोग से भी राहत नहीं मिली। आखिरकार राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए निचले दोनों आयोगों के आदेश निरस्त कर दिए।

आयोग ने बीमा कंपनी को चार सप्ताह के भीतर 20 लाख रुपये और मृत्यु की तारीख से छह महीने बाद की अवधि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता राजेश भावनानी ने बताया कि मामला कबीरधाम जिले की बोड़ला तहसील के माराडबरा गांव की तिहारो चिचाम का है।

उनके पति गणेश चिचाम का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बोड़ला शाखा में बचत खाता था। बैंक के माध्यम से एक हजार रुपये प्रीमियम लेकर उनके नाम पर व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी जारी की गई थी। पॉलिसी में दुर्घटना से मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये देने का प्रविधान था।

विषैले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने आठ अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में पाया कि मृतक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं था। केवल एफआइआर और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उचित नहीं था।

रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट में भी विषैले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं हुई थी। आयोग ने जिला और राज्य उपभोक्ता आयोगों के आदेश निरस्त करते हुए तिहारो चिचाम को बीमा पॉलिसी के तहत 20 लाख रुपये पाने का हकदार माना।

सड़क हादसे में गई जान, दावे पर लगा अड़ंगा

19 नवंबर 2023 को गणेश चिचाम मोटरसाइकिल से तरेगांव जंगल से अपने गांव लौट रहे थे। मछलीरवां मंदिर के पास सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए के तहत अपराध दर्ज किया। पति की मौत के बाद तिहारो ने बीमा राशि मांगी, लेकिन कंपनी ने मृतक की कथित लापरवाही और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया।

बीमा राशि के लिए महिला ने जिला उपभोक्ता आयोग कबीरधाम में शिकायत की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी जिला आयोग का फैसला बरकरार रखा। इसके बाद तिहारो ने अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के माध्यम से राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में अपील की।

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