‘कारगिल में अपने सैनिकों की लाश छोड़ने वाले हमें ज्ञान दे रहे…’ UN में भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा

संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर पाकिस्तान पर सवाल उठाए हैं। भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में कोविड-19 महामारी के दौरान कथित गलत प्रथाओं के लिए ग्लोबल साउथ के देशों को जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि विकसित देशों में सामने आई समान घटनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

आतंकवाद और उसके पीड़ितों के अधिकारों पर भारत का जोर

संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान में आतंकवादियों की गतिविधियों और उनके अंतिम संस्कार से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का प्रभाव केवल निर्दोष लोगों की जान जाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे समाज और देश का मनोबल भी प्रभावित होता है। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवादियों के अधिकारों पर चर्चा करते समय आतंकवादी हमलों के पीड़ितों और उनके परिवारों के अधिकारों को भी समान रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।

कारगिल युद्ध का जिक्र कर पाकिस्तान पर निशाना

भारतीय राजनयिक ने 1999 के कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने युद्ध के दौरान कई पाकिस्तानी सैनिकों के शवों को सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया था।

मंगलानंदन ने धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों पर पाकिस्तान की टिप्पणियों के संदर्भ में इस घटना का जिक्र किया और मानवीय मूल्यों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

जम्मू-कश्मीर और अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठा

भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की टिप्पणियों को भी खारिज किया। मंगलानंदन ने पाकिस्तान से अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों की स्थिति पर ध्यान देने को कहा और रावलाकोट का उल्लेख किया। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उनके अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया।

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‘अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर पाने वाला देश भारत को न दे नसीहत’

अपने संबोधन में भाविका मंगलानंदन ने कहा कि जो देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता, उसे भारत को उपदेश देने का अधिकार नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस बयान ने आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मतभेदों को फिर सामने ला दिया।

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