रायपुर। मुरिया दरबार के राजनीतिकरण के आरोप पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि जिस जनजाति समाज का कांग्रेस ने लगातार वोट बैंक के रूप के उपयोग किया, आज वह समाज कांग्रेस को छोड़ चुका है. जनजाति समाज का हम लगातार विकास कर रहे हैं. कांग्रेस के लोग बताएं कि इतने साल देश में राज किया, तब जनजाति समाज के लिए क्या किया?
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के साथ जगदलपुर के लिए रवाना होने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चर्चा की. इस दौरान उन्होंने दौरे को लेकर कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन है. बस्तर में सब से लंबा बस्तर दशहरा मनाया जाता है. पहली बार देश की राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में शामिल हो रही है.
मुरिया दरबार विवाद
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की करीब 700 साल पुरानी परंपरा मुरिया दरबार के नाम को लेकर विवाद तब खड़ा हुआ, जब बस्तर दशहरा के कार्यक्रमों की जानकारी देने वाले प्रशासनिक पाम्पलेट में मुरिया दरबार की जगह ‘आम दरबार’ छाप दिया गया. इसके बाद सोशल मीडिया में यह बातें तैरने लगी और जमकर इस बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे. मामला गरमाने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को नया पाम्पलेट जारी किया है, जिसमें ‘आम दरबार’ की जगह फिर से ‘मुरिया दरबार’ नाम दर्ज किया गया है.
बस्तर की ऐतिहासिक परंपरा है मुरिया दरबार
मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है. राजशाही के दौर में राजा इस दरबार में बैठते थे, जहां गांवों के मांझी-चालकी अपने क्षेत्र की समस्याएं रखते थे और राजा उनका समाधान करते थे. राजशाही समाप्त होने के बाद भी यह परंपरा जारी है. अब मुख्यमंत्री इस दरबार में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं.
पिछले साल अमित शाह हुए थे शामिल
पिछले वर्ष केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मुरिया दरबार में शामिल हुए थे, जबकि इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम है जहां वे मांझी-चालकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों से उनके गांवों की समस्याएं सुनेंगी.

