
रायपुर। जमीन का सौदा किया, खरीदार से 35 लाख रुपये से अधिक वसूल लिए और जब रजिस्ट्री की बारी आई तो खुद ही लापता हो गया। पीछे से पत्नी ने थाने पहुंचकर पति की गुमशुदगी दर्ज करा दी। खरीदार को भरोसा दिलाया जाता रहा कि पति के लौटते ही जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक दस्तावेज तैयार कर लिया गया। जिस जमीन के लिए उसने लाखों रुपये दिए थे, वही जमीन पति ने पत्नी के नाम दान विलेख के जरिये हस्तांतरित कर दी। मंदिर हसौद पुलिस ने पति करण मन्नाडे और पत्नी रूखमणी मन्नाडे के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है।
कोटवार के जरिये हुआ था जमीन का सौदा
न्यू राजेंद्र नगर निवासी रजनीकांत सिंह ने पुलिस को बताया कि ग्राम मुनरेठी के कोटवार रोहित रविदास के माध्यम से उनकी पहचान जमीन मालिक करण मन्नाडे से हुई थी। करण अपनी कृषि भूमि का कुछ हिस्सा बेचना चाहता था। जमीन देखने के बाद 790 रुपये वर्गफुट की दर से सौदा तय हुआ। 14 अक्टूबर 2024 को करीब 6,780 वर्गफुट जमीन का विक्रय अनुबंध किया गया। रजिस्ट्री के लिए तीन से चार महीने का समय निर्धारित हुआ था।
कभी कागज तो कभी नाप के नाम पर वसूली
शिकायतकर्ता के मुताबिक जमीन की रजिस्ट्री कराने के बजाय करण अलग-अलग बहाने बनाकर पैसे मांगता रहा। कभी जमीन के दस्तावेज बनवाने तो कभी नाप कराने और अन्य जरूरतों का हवाला दिया गया। खरीदार का दावा है कि उसने 11 जून 2025 तक कुल 35 लाख 1240 रुपये दे दिए। इसके बाद भी रजिस्ट्री नहीं हुई। करण ने फोन उठाना बंद कर दिया तो खरीदार ने अधिवक्ता के माध्यम से छह अगस्त 2025 को कानूनी सूचना भेजी। सात अगस्त को समाचार पत्रों में आम सूचना भी प्रकाशित कराई, ताकि जमीन का कोई दूसरा सौदा न हो सके।
पत्नी ने कहा- पति लापता है, रजिस्ट्री का दिया भरोसा
इस बीच जब खरीदार ने जमीन के संबंध में जानकारी जुटाई तो करण की पत्नी रूखमणी ने बताया कि उसका पति बिना कुछ बताए घर से चला गया है। 14 जुलाई 2025 को उसने मंदिर हसौद थाने में पति की गुमशुदगी की सूचना भी दर्ज कराई थी। पत्नी ने कोटवार के माध्यम से भरोसा दिलाया कि पति के लौटते ही जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी। लेकिन खरीदार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि इसी दौरान जमीन के मालिकाना हक में बदलाव किया जा चुका है।
राजस्व अभिलेखों की जांच में पता चला पत्नी को दान दी भूमि
शिकायतकर्ता को बाद में राजस्व अभिलेखों से पता चला कि छह अगस्त 2025 को करण और उसकी पत्नी रूखमणी ने आपसी सहमति से इकरारनामा वाली जमीन सहित करण की अन्य जमीन भी पत्नी के नाम दान विलेख के जरिये हस्तांतरित कर दी थी। पुलिस ने करण को पांच दिसंबर 2025 को दस्तयाब किया था। खरीदार का आरोप है कि रजिस्ट्री की जिम्मेदारी से बचने और उसकी रकम हड़पने के लिए पति-पत्नी ने मिलकर गुमशुदगी और जमीन हस्तांतरण का षड्यंत्र रचा।









