टके डेस्क।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब सिर्फ सवालों के जवाब देने, तस्वीरें बनाने या ऑफिस के काम आसान करने तक सीमित नहीं रह गया है। AI को इंसानी शरीर से जोड़ने की दिशा में भी प्रयोग तेजी से हो रहे हैं। ऐसा ही एक प्रयोग अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MIT के 48 घंटे के हैकाथॉन में देखने को मिला। यहां रिसर्चर्स की एक टीम ने Human Operator नाम का एक वियरेबल डिवाइस तैयार किया है।
यह डिवाइस AI के निर्देशों को इंसानी हाथ की शारीरिक गतिविधि में बदलने की कोशिश करता है। इसके लिए डिवाइस इलेक्ट्रिकल पल्स के जरिए हाथ की कुछ मांसपेशियों को उत्तेजित करता है, जिससे उंगलियों और कलाई में हलचल पैदा की जा सकती है।
हैकाथॉन में मिला पहला स्थान
Human Operator प्रोजेक्ट को MIT के हैकाथॉन की Learn Track कैटेगरी में पहला स्थान मिला। इसे पीटर हे, एशले नील, वाल्डेमार डैनरी, डेनियल काइजर, युतोंग वू और सीन लुईस की टीम ने मिलकर तैयार किया है।
इस प्रोजेक्ट का मकसद कोई सामान्य कंज्यूमर गैजेट बनाना नहीं है। डेवलपर्स ने इसे AI और इंसानी शरीर के बीच सीधे इंटरफेस की संभावनाओं को समझने वाले शुरुआती प्रयोग के तौर पर पेश किया है।
कैसे काम करता है Human Operator?
Human Operator में कई अलग-अलग तकनीकों को एक साथ जोड़ा गया है। इसमें हेड-माउंटेड कैमरा, वॉयस कमांड, AI मॉडल, Arduino आधारित कंट्रोल सिस्टम और EMS यानी Electrical Muscle Stimulation हार्डवेयर शामिल हैं।
इसकी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझें तो पहले यूजर बोलकर निर्देश देता है। कैमरा आसपास की स्थिति को देखता है और AI इन दोनों तरह की जानकारी को समझने की कोशिश करता है। इसके बाद सिस्टम तय करता है कि किस तरह का शारीरिक मूवमेंट करना है।
फिर AI से मिलने वाला निर्देश इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम तक पहुंचता है। यह सिस्टम EMS डिवाइस को सक्रिय करता है, जो संबंधित मांसपेशियों को इलेक्ट्रिकल पल्स देता है। इन पल्स की वजह से मांसपेशियों में संकुचन होता है और हाथ या उंगलियों में हलचल पैदा होती है।
कैमरा और AI की क्या भूमिका है?
Human Operator में लगा कैमरा यूजर के सामने मौजूद वातावरण को कैप्चर करता है। इसके साथ वॉयस इनपुट भी लिया जाता है। इन जानकारियों को AI मॉडल प्रोसेस करता है।
प्रोजेक्ट में Anthropic के Claude API से जुड़े विजन-लैंग्वेज AI मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। इसका काम यूजर की आवाज और कैमरे से मिली दृश्य जानकारी को समझकर आगे के निर्देश तैयार करना है।
यानी सिस्टम केवल यह नहीं सुनता कि यूजर क्या कह रहा है, बल्कि आसपास के वातावरण को भी समझने की कोशिश करता है।
इलेक्ट्रिकल पल्स से हाथ में आती है हलचल
AI से निर्देश मिलने के बाद सिग्नल Arduino कंट्रोल रिले सिस्टम तक भेजे जाते हैं। इसके बाद यह सिस्टम TENS-EMS डिवाइस को सक्रिय करता है।
EMS यानी Electrical Muscle Stimulation तकनीक में इलेक्ट्रिकल सिग्नल के जरिए मांसपेशियों को उत्तेजित किया जाता है। Human Operator में इसी तकनीक का इस्तेमाल हाथ की मांसपेशियों में हलचल पैदा करने के लिए किया गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि AI सीधे दिमाग को नियंत्रित कर रहा है। यहां AI पहले निर्देश तैयार करता है और फिर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम उन निर्देशों के अनुसार मांसपेशियों को उत्तेजित करने की कोशिश करता है।
प्रोजेक्ट का सोर्स कोड भी किया गया सार्वजनिक
Human Operator को लेकर डेवलपर्स ने इसके सोर्स कोड, निर्माण से जुड़ी जानकारी और हार्डवेयर संबंधी विवरण सार्वजनिक किए हैं। इससे दूसरे रिसर्चर्स और डेवलपर्स इस सिस्टम को समझकर आगे के प्रयोग कर सकते हैं।
ऐसे ओपन रिसर्च प्रोजेक्ट का फायदा यह है कि अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ AI, रोबोटिक्स, बायोइलेक्ट्रॉनिक्स और असिस्टिव टेक्नोलॉजी को जोड़कर इस तरह की तकनीक को आगे विकसित कर सकते हैं।
अभी कमर्शियल प्रोडक्ट नहीं है
डेवलपर्स के मुताबिक Human Operator को बाजार में बेचने के लिए तैयार नहीं किया गया है। यह फिलहाल एक रिसर्च प्रोजेक्ट है, जिसका फोकस Embodied AI यानी ऐसे AI सिस्टम पर है जो डिजिटल दुनिया में जानकारी देने के बजाय वास्तविक दुनिया में किसी भौतिक कार्रवाई से जुड़ सकें।
आम AI चैटबॉट टेक्स्ट के जरिए जवाब देते हैं और कुछ AI सिस्टम तस्वीरें, वीडियो या दूसरी डिजिटल सामग्री तैयार करते हैं। Human Operator जैसे प्रोजेक्ट AI को भौतिक दुनिया में किसी व्यक्ति की गतिविधि के साथ जोड़ने की दिशा में एक अलग तरह का प्रयोग दिखाते हैं।
सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा
इंसानी मांसपेशियों को इलेक्ट्रिकल पल्स के जरिए उत्तेजित करने वाली तकनीक में सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। अगर इलेक्ट्रिकल सिग्नल की तीव्रता या टाइमिंग सही नहीं हो, तो अनचाही मांसपेशी गतिविधि या असुविधा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इस तरह के सिस्टम में यूजर के शरीर के अनुसार सेटिंग करना जरूरी होगा। इसके अलावा आपात स्थिति में तुरंत सिस्टम बंद करने के लिए Emergency Stop जैसी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
भविष्य के ज्यादा उन्नत सिस्टम में EMG यानी Electromyography जैसे सेंसर भी उपयोगी हो सकते हैं। ऐसे सेंसर मांसपेशियों की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को मापकर सिस्टम को यूजर की वास्तविक मांसपेशी गतिविधि के बारे में जानकारी दे सकते हैं। इससे नियंत्रण और सुरक्षा को बेहतर बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
मेडिकल क्षेत्र में हो सकता है इस्तेमाल
इस तरह की तकनीक का एक संभावित उपयोग मेडिकल रिहैबिलिटेशन में हो सकता है। उदाहरण के लिए, ऐसी तकनीक पर आगे शोध करके उन लोगों के लिए असिस्टिव सिस्टम तैयार करने की कोशिश की जा सकती है जिन्हें हाथ या उंगलियों की गतिविधियों में परेशानी होती है।
विकलांग लोगों के लिए बनाए जाने वाले असिस्टिव डिवाइस में भी AI और इलेक्ट्रिकल मसल स्टिमुलेशन को जोड़ने पर शोध किया जा सकता है। हालांकि, मेडिकल इस्तेमाल के लिए केवल एक हैकाथॉन प्रोटोटाइप पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए व्यापक परीक्षण, सुरक्षा जांच, मेडिकल ट्रायल और संबंधित नियामकीय मंजूरियों की जरूरत होगी।
AI और इंसानी शरीर के बीच नई कड़ी
Human Operator जैसे प्रयोग AI की भूमिका को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें AI केवल डिजिटल जानकारी तैयार करने के बजाय कैमरा, आवाज और इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर की मदद से वास्तविक दुनिया में किसी शारीरिक क्रिया से जुड़ता है।
फिलहाल यह तकनीक शुरुआती प्रयोग के स्तर पर है और इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए तैयार उत्पाद नहीं माना जा सकता। लेकिन इस तरह के प्रोजेक्ट AI, वियरेबल टेक्नोलॉजी और मानव-मशीन इंटरफेस के बीच होने वाले भविष्य के शोध के लिए एक नया क्षेत्र जरूर सामने रखते हैं।

