CG: ‘अर्णब’ तूफान से लाल हुआ आसमान! क्या है हैरान करने वाले नजारे का विज्ञान?

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर के बीच आसमान का रंग अचानक लाल हो गया। इस अजीबोगरीब आसमानी नजारे ने स्थानीय लोग हैरत में पड़ गए। तेज हवाओं और बिगड़ते मौसम के बीच आसमान के लाल होने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यह हैरान करने वाला नजारा ऐसे वक्त में देखने को मिला, जब अर्नब तूफान के कारण मध्य भारत में गरज-चमक, आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी हो रही है।

क्या चक्रवात है लाल आसमान की वजह?

लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह डरावना लाल रंग तूफान की वजह से है? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही तूफानी सिस्टम ने ऐसे हालात बनाए हों, लेकिन लाल आसमान और अर्नब तूफान के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। दरअसल, वायुमंडल की स्थिति, बादलों का घेरा, हवा में तैरती धूल और सूरज की स्थिति जैसे कई कारक मिलकर आसमान के रंग को बदलते हैं।

विज्ञान की नजर में क्यों लाल होता है आसमान?

आसमान के लाल या नारंगी दिखने के पीछे मुख्य रूप से सूर्य के प्रकाश का बिखराव जिम्मेदार होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय, सूरज की रोशनी को वायुमंडल की एक लंबी परत से होकर गुजरना पड़ता है।

इस दौरान नीले रंग जैसी छोटी तरंग दैर्ध्य वाले रंग रास्ते में ही बिखर जाते हैं, जबकि लाल और नारंगी रंग की लंबी तरंगें हमारी आंखों तक पहुंचती हैं। इसे विज्ञान में ‘रेले स्कैटरिंग’ कहा जाता है। तूफान के दौरान हवा में मौजूद धूल, धुएं और पानी की बूंदें भी इस बिखराव को बढ़ा देती हैं, जिससे आसमान का रंग गहरा लाल दिखने लगता है।

तूफानी हवाओं ने बढ़ाई लोगों की चिंता

इस अजीब आसमानी घटना के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी दर्ज की गईं। कई जगहों पर हवा के झोंके 90 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गए। मौसम के इस रौद्र रूप के कारण पेड़ गिरने, कमजोर इमारतों को नुकसान पहुंचने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।

आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद तूफान ‘अर्नब’ भले ही कमजोर पड़ गया हो, लेकिन इसका असर अब भी अंदरूनी राज्यों में भारी बारिश और आंधी के रूप में दिख रहा है। फिलहाल लाल आसमान भले ही कौतूहल का विषय बना हुआ है, लेकिन असल चिंता खराब मौसम और तूफान से होने वाले नुकसान की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे आधिकारिक अलर्ट पर ध्यान दें और गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।

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