
राजधानी दिल्ली में दिवाली से ठीक पहले और त्योहार के दौरान वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। हवा की धीमी रफ्तार और प्रतिबंधों के बावजूद हुई आतिशबाजी के कारण राजधानी की हवा और जहरीली हो गई है। दिल्ली के 23 इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंच गया है, जो गंभीर श्रेणी में आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 8 नवंबर 2026 की सुबह 7:05 बजे तक दिल्ली का औसत AQI 384 दर्ज किया गया। यह बहुत खराब श्रेणी में आता है। वहीं, कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंचने से लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
जहांगीरपुरी में सबसे अधिक 450 AQI दर्ज किया गया है। वहीं, पंजाबी बाग, आरके पुरम, रोहिणी और बवाना समेत कई इलाकों में भी वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। प्रदूषण के आंकड़ों के मुताबिक, आरके पुरम में 448, पंजाबी बाग में 449, रोहिणी में 445, आईआईटी दिल्ली में 445, बवाना में 446 और एनएसआईटी द्वारका में 441 AQI दर्ज किया गया है। इन इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक बना हुआ है।
दिल्ली के प्रमुख प्रदूषित इलाकों का AQI
इलाका/निगरानी केंद्र AQI श्रेणी
जहांगीरपुरी 450 गंभीर
पंजाबी बाग 449 गंभीर
आरके पुरम 448 गंभीर
बवाना 446 गंभीर
रोहिणी 445 गंभीर
आईआईटी दिल्ली 445 गंभीर
एनएसआईटी द्वारका 441 गंभीर
बुराड़ी क्रॉसिंग 414 गंभीर
अलीपुर 413 गंभीर
सुभाष नगर/राजौरी गार्डन 384 बहुत खराब
बुराड़ी 370 बहुत खराब
आया नगर 365 बहुत खराब
बदरपुर 349 बहुत खराब
आनंद विहार 344 बहुत खराब
अशोक विहार 323 बहुत खराब
तापमान में भी आएगी गिरावट
प्रदूषण के साथ-साथ दिल्ली के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। दिन के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है। अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। शनिवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था। वहीं, न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
केवल दो घंटे पटाखे जलाने की अनुमति
निर्धारित नियमों के मुताबिक, 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। इसके अलावा अन्य समय में आतिशबाजी करने की अनुमति नहीं होगी। अस्पताल, हेल्थ सेंटर, वृद्धाश्रम और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। इन क्षेत्रों को साइलेंस जोन के रूप में निर्धारित किया गया है।
बेरियम और पारंपरिक पटाखों पर रोक
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बेरियम युक्त पटाखों, पारंपरिक पटाखों और लड़ी जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। लोगों को केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रमाणित ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने की अनुमति है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत पटाखे जब्त किए जाएंगे, विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और पुलिस एफआईआर दर्ज कर अभियोजन की कार्रवाई करेगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध दोबारा लागू रहेगा।
प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन सतर्क
दिल्ली में पहले से ही वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। ऐसे में पटाखों के इस्तेमाल पर सख्ती का उद्देश्य प्रदूषण के स्तर को और बढ़ने से रोकना है। प्रशासन ने लोगों से निर्धारित नियमों का पालन करने और पर्यावरण एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की है।









