Edible Oils Import Duty Cut: देश में फेस्टिव सीजन शुरू होने के साथ ही एक बार फिर महंगाई बढ़ सकती है। तेल-चीनी और दालें पर इसका असर दिख सकता है। इसे देखते हुए महंगाई को स्थिर रखने के लिए मोदी सरकार ने त्योहारी सीजन में बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने त्योहारी सीजन में खाने के तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी है। मोदी सरकार ने कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों पर लागू मूल आयात शुल्क में कटौती (Govt Cuts Import Duty) कर दी है। सरकार के इस फैसले से खाने के तेल के दामों में गिरावट देखने को मिल सकती है। मोदी सरकार की ओर से बुधवार देर रात अधिसूचना जारी की।
बता दें कि भारत में वनस्पति तेल की कीमतों में पिछले एक साल में लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सरकार की ओर से आयात शुल्क में की गई इस बड़ी कटौती से कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। यानी सितंबर से नवंबर तक के प्रमुख धार्मिक त्योहारों के दौरान मिठाई, नमकीन और तले हुए खाद्य पदार्थों की खपत में इजाफा देखने को मिल सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के इस फैसले से अब फेस्टिव सीजन में ताड़ का तेल, सोया तेल और सूरजमुखी का तेल समेत अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे गृहणियों के रसोई का बजट नहीं बिगड़ेगा और त्योहारों में जमकर पकवान बना सकेंगी। वहीं सरकार की अधिसूचना के मुताबिक कच्चे पाम तेल और कच्चे सोया तेल पर मूल आयात शुल्क अब 10% से घटाकर आधा यानी 5% कर दिया गया है। इसके अलावा रिफाइंड पाम तेल और सोया तेल पर आयात शुल्क 32.5% से कम करके 27.5% कर दिया है। इसके अलावा कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क को 10% से घटाकर अब सरकार ने जीरो कर दिया है। रिफाइंड सूरजमुखी ऑयल पर इसे 32.5% से 22.5% किया है। वहीं कच्चे ताड़ के तेल और कच्चे सोयाबीन ऑयल पर कुल आयात शुल्क 11% कर दिया है। इससे पहले यह 16.5% लग रहा था।
आम लोगों को मिलेगी महंगाई से राहत?
IVPA के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि कुछ खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क घटाने का फैसला ऐसे महत्वपूर्ण समय में आया है, जब त्योहारी मौसम नजदीक है। उन्होंने कहा, ‘‘कम आयात शुल्क से आयातित खाद्य तेल की लागत कम होनी चाहिए, जिससे उपभोक्ता कीमतों में कुछ कमी आ सकती है। देसाई ने कहा कि खाद्य तेल उद्योग के लिए तत्काल प्राथमिकता आगामी त्योहारी महीनों के दौरान देशभर में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना है।
भारत 55-60 फीसदी वनस्पति तेल आयात करता है
बता दें कि भारत अपनी वनस्पति तेल की लगभग दो-तिहाई मांग (55-60 फीसदी ) आयात के माध्यम से पूरी करता है। खासतौर पर मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से ताड़ का तेल, सोया तेल और सूरजमुखी का तेल आयात होता है। पाम ऑयल बहुत सस्ता होता है, इसलिए बिस्किट, नमकीन, स्नैक्स वगैरह में और बाहर होटल-ढाबों के खाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। सोयाबीन ऑयल, हल्का तेल माना जाता है। ये भी थोड़ा सस्ता होता है। वहीं सूरजमुखी का तेल भी पचने में हल्का माना जाता है, इसलिए शहरी परिवारों में लोग इसका खूब इस्तेमाल करते हैं।

