NCERT ने कक्षा 9 की नई सोशल साइंस पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड–पार्ट 1’ में संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को शामिल नहीं किया है। इसके साथ ही प्रस्तावना में मौजूद ‘संप्रभु (Sovereign), समाजवादी (Socialist), पंथनिरपेक्ष (Secular), लोकतांत्रिक (Democratic) और गणराज्य (Republic)’ जैसे शब्दों की भी व्याख्या नहीं दी गई है। हालांकि, पुस्तक में संविधान के निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों पर चर्चा की गई है।
इमरजेंसी पर नया अध्याय
नई पुस्तक में 1975-77 की राष्ट्रीय इमरजेंसी पर अलग सेक्शन जोड़ा गया है। इसमें इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। पुस्तक के अनुसार, उस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लागू हुई और कई विपक्षी नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक असर पड़ा।
जयप्रकाश नारायण आंदोलन का उल्लेख
किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम जनता को संगठित कर बिहार और गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े किए। साथ ही यह भी उल्लेख है कि 1977 में इमरजेंसी समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में जनता ने मतदान के जरिए तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर कर भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का परिचय दिया।
इंदिरा सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध का जिक्र
पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जन असंतोष बढ़ा। इसी पृष्ठभूमि में जून 1975 में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई।
चुनाव आयोग की भूमिका पर जोर
नई किताब में भारत के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की सराहना की गई है। इसमें कहा गया है कि 2024 में 96.8 करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव का सफल संचालन बड़ी चुनौती है। पुस्तक के अनुसार, चुनाव आयोग RPA कानून, आदर्श आचार संहिता, EVM, VVPAT और मतदाता जागरूकता अभियानों के जरिए निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। साथ ही छात्रों को 1977 से 2024 तक के लोकसभा चुनावों में विजयी गठबंधनों का अध्ययन करने के लिए भी कहा गया है।


