‘धार्मिक कारणों से न गाने पर कार्रवाई नहीं हो’, 47 दिन पहले बने ‘वंदे मातरम्’ कानून पर SC ने केंद्र से मांगा जवाब

 वंदे मातरम् गाने की अनिवार्यता और इससे जुड़े नए कानूनी प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक कारणों से राष्ट्रगीत नहीं गाता है, तो उसे केवल इस आधार पर आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।

वंदे मातरम् न गाने पर क्या होगी सजा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल की जांच पर सहमति जताई कि क्या वंदे मातरम् न गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल यह तय करने से इनकार किया कि राष्ट्रगीत को केवल पहले दो अंतरों तक सीमित रखा जाए या इसके सभी छह अंतरों का गायन किया जाए।

2026 में Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में संशोधन के जरिए वंदे मातरम् को भी कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया। संशोधन के तहत राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या सार्वजनिक रूप से उसका अपमान करना अपराध माना गया है और अधिकतम तीन साल की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

मामला प्रसिद्ध गायक टीएम कृष्णा की याचिका से जुड़ा है। याचिका में तर्क दिया गया है कि वंदे मातरम् के अंतिम चार अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भक्ति का उल्लेख है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन्हें अनिवार्य रूप से गाने की बाध्यता धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों के सवाल उठाती है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के Bijoe Emmanuel v. State of Kerala फैसले का संदर्भ लिया। इस मामले में तीन छात्रों ने अपने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था, लेकिन वे सम्मानपूर्वक खड़े रहे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर के बीच भी तीखी बहस हुई। संवैधानिक प्रक्रिया पर दलील के दौरान मेहता द्वारा ‘नक्सली’ शब्द के इस्तेमाल पर मुरलीधर ने आपत्ति जताई। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप होने के बावजूद संविधान के तहत उसके अधिकार बने रहते हैं।

अब मुख्य सवाल यह है कि वंदे मातरम् के अपमान या गायन में बाधा डालने पर लागू नए आपराधिक प्रावधानों की सीमा क्या होगी और धार्मिक स्वतंत्रता के साथ इसका संतुलन कैसे तय किया जाएगा।

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