रायपुर। राज्य सरकार ने औद्योगिक क्रांति और श्रमिकों के हितों को नई ऊंचाई देने के लिए औद्योगिक संबंध (छत्तीसगढ़) नियम, 2026 का प्रारूप जारी कर दिया है। केंद्र सरकार की औद्योगिक संबंध संहिता के तहत लाए जा रहे इस बदलाव से दशकों पुराने और जटिल श्रम नियम अब इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।
प्रारूप के अनुसार अब किसी भी औद्योगिक संस्थान में श्रमिक अचानक हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। उन्हें कम से कम 14 दिन पूर्व लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा।
सरकार की ओर से सूचना जारी
इस कदम का उद्देश्य उत्पादन के नुकसान को रोकना और प्रबंधन व श्रमिकों के बीच बातचीत के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। सरकार की ओर से जारी सूचना के अनुसार, नए नियमों के लागू होते ही छत्तीसगढ़ औद्योगिक विवाद नियम 1957, व्यावसायिक संघ विनियम 1961 और औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) नियम 1963 से चले आ रहे पुराने कानून निष्प्रभावी हो जाएंगे।
इनके स्थान पर एक एकीकृत कानूनी ढांचा काम करेगा। इससे औद्योगिक विवादों का निपटारा डिजिटल माध्यम से तेजी से हो सकेगा। श्रम विभाग ने इस प्रारूप पर 30 दिनों के भीतर दावा-आपत्ति मांगी है।
संस्थानों में शिकायत निवारण समिति अनिवार्य
सरकार ने औद्योगिक परिदृश्य को बदलने और श्रमिक हितों को आधुनिक ढांचे में ढालने की तैयारी पूरी कर ली है। केंद्र की औद्योगिक संबंध संहिता के अनुरूप श्रम विभाग ने नए नियमों का प्रारूप सार्वजनिक कर दिया है। इन नियमों के लागू होने से न केवल औद्योगिक विवादों का त्वरित निपटारा होगा, बल्कि कार्यस्थलों पर पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
जिन संस्थानों में 20 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, वहां शिकायत निवारण समिति का गठन अनिवार्य होगा। श्रमिक, विवाद के एक वर्ष के भीतर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। समिति में महिला कामगारों की संख्या के अनुपात में उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य है। समिति में सदस्यों की अधिकतम संख्या 20 तय की गई है।
डिजिटल होगा औद्योगिक ढांचा
आधुनिकीकरण को बढ़ावा देते हुए अब ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन होगा। आवेदन से लेकर प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक की प्रक्रिया डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संपन्न होगी। साथ ही, समझौतों और अन्य दस्तावेजों को भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
छंटनी से पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी
300 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली इकाइयों को छंटनी या क्लोजर से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। विभाग ने इस प्रारूप पर आम जनता और उद्योगपतियों से 30 दिनों के भीतर सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं। सुझाव अवर सचिव, श्रम विभाग, महानदी भवन को भेजे जा सकते हैं।


