‘बोल मैं शेर हूं’; अरविंद केजरीवाल का E-20 पेट्रोल को लेकर चुटकुले से PM मोदी पर तंज

 दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने E-20 पेट्रोल के मुद्दे पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। केजरीवाल पिछले कुछ दिनों से E-20 पेट्रोल नीति को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और सोमवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक चुटकुले के माध्यम से सरकार पर तंज कसा। केजरीवाल ने अपने बयान में E-20 पेट्रोल से वाहनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और आम लोगों पर बढ़ने वाले आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि सरकार की नीतियों का असर अब लोगों की जेब और वाहनों दोनों पर पड़ सकता है।

इस बार उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में अपनी बात रखी। केजरीवाल ने वीडियो में एक चुटकुले का जिक्र करते हुए कहा कि E-20 पेट्रोल को देश में किस तरह लागू किया जा रहा है, इसे इसी उदाहरण से समझा जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक काल्पनिक प्रतियोगिता में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुलिस टीमों को जंगल में छोड़े गए शेर को खोजने का काम दिया गया। चुटकुले में ट्रंप की पुलिस 24 घंटे में शेर को ढूंढ लाती है, जबकि पुतिन की पुलिस एक घंटे में उसे खोज लेती है। इसके बाद मोदी की पुलिस को भेजा जाता है, लेकिन कई दिनों तक वह वापस नहीं लौटती। बाद में जब लोग जंगल में उन्हें खोजने जाते हैं तो कथित तौर पर पुलिस एक कुत्ते को पकड़कर उससे जबरन यह कहलवाने की कोशिश कर रही होती है कि वह शेर है।

चुटकुले के माध्यम से E-20 नीति की आलोचना करने के बाद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर उठने वाली आलोचनात्मक आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “यही हाल आज पूरे देश का मोदी जी ने किया हुआ है। 140 करोड़ लोगों को पीट रहे हैं और कह रहे हैं कि बोलो E-20 सही है। जो E-20 के खिलाफ आवाज उठाता है, उसका पेज डाउन करा देते हैं, उसका वीडियो डिलीट करा देते हैं, उसका अकाउंट ब्लॉक कर एफआईआर करा देते हैं। उसके खिलाफ गुंडागर्दी करते हैं और तरह-तरह से उसे तंग करते हैं। ऐसे 140 करोड़ लोगों को कैसे दबाओगे मोदी जी?” केजरीवाल ने दावा किया कि E-20 पेट्रोल को लेकर जनता के मन में कई सवाल हैं और सरकार को इनका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और आलोचनात्मक विचारों को दबाने के बजाय सरकार को खुलकर चर्चा करनी चाहिए

केजरीवाल ने दावा किया है कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में E-20 ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम लागू किया है। उनका आरोप है कि इस नीति का उद्देश्य अमेरिका से बड़े पैमाने पर एथेनॉल आयात का रास्ता तैयार करना है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक दस्तावेज या साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया है। AAP प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने आवश्यक बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को अपग्रेड किए बिना और मौजूदा वाहनों को अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुकूल बनाए बिना E-20 नीति को जल्दबाजी में लागू कर दिया। उनके अनुसार, इससे वाहन मालिकों को तकनीकी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। केजरीवाल का कहना है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं जो मूल रूप से E-20 ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे। ऐसे में सरकार को पहले वाहन उद्योग, ईंधन आपूर्ति तंत्र और उपभोक्ताओं को पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए थे।

केजरीवाल ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार के दबाव का सामना करने में केंद्र सरकार विफल रही है। उनके अनुसार, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक देश है, लेकिन वहां उत्पादित एथेनॉल की पूरी खपत नहीं हो पा रही है। ऐसे में अमेरिका भारत जैसे बड़े बाजारों में एथेनॉल की मांग बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि इसी उद्देश्य से भारत पर E-20 नीति लागू करने और अमेरिका से बड़े पैमाने पर एथेनॉल आयात करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने पिछले वर्ष अमेरिका से करीब एक अरब लीटर एथेनॉल आयात किया था, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा पांच अरब लीटर तक पहुंच सकता है।

केजरीवाल ने कहा कि E-20 नीति का वास्तविक उद्देश्य अमेरिकी एथेनॉल के लिए नया बाजार तैयार करना है। उनका आरोप है कि सरकार इस नीति के प्रभावों को लेकर जनता को पूरी जानकारी नहीं दे रही और जल्दबाजी में इसे लागू कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में भी पूरे देश में E-20 ईंधन लागू नहीं किया गया है और वहां आज भी बड़े पैमाने पर कम एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग होता है। ऐसे में भारत में व्यापक स्तर पर E-20 लागू करने के फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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