कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची विवाद में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने मामले में शिकायतकर्ता की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति दे दी है। यह मामला सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) विनोद जोशी ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की है।
क्या है सोनिया गांधी से जुड़ा वोटर लिस्ट विवाद?
यह शिकायत वरिष्ठ अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने दर्ज कराई है। आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्हें अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता मिली थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होना नियमों के खिलाफ था।
दस्तावेजों के अनुसार, सोनिया गांधी का नाम 1980 में मतदाता सूची में शामिल हुआ, 1982 में हटाया गया और 1983 में दोबारा जोड़ा गया। शिकायत में उनके तत्कालीन आवासीय पते सफदरजंग रोड, नई दिल्ली का भी उल्लेख किया गया है।
सत्र न्यायालय ने क्यों पलटा मजिस्ट्रेट का आदेश?
इससे पहले ACJM अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था। शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने इस फैसले को चुनौती दी थी। 21 सितंबर को विशेष न्यायाधीश (MP-MLA मामले) विशाल गोगने ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि शिकायत को अपुष्ट दस्तावेज की फोटोकॉपी के आधार पर खारिज किया गया और आदेश में पर्याप्त कारण भी दर्ज नहीं किए गए।
18 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सत्र न्यायालय ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में वापस भेज दिया है। अदालत संबंधित पुलिस अधिकारी से स्टेटस रिपोर्ट भी मांग सकती है। अब 18 नवंबर को होने वाली सुनवाई में शिकायत और पेश किए जाने वाले अतिरिक्त दस्तावेजों पर आगे विचार होगा। हालांकि, अदालत के इस फैसले का मतलब सोनिया गांधी के खिलाफ आरोप साबित होना या FIR दर्ज करने का आदेश नहीं है। मामले में अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है।



