नई दिल्ली। साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर संदिग्ध ऐप्स के विज्ञापन दिखाकर यूजर्स को निशाना बनाने का मामला सामने आया है। गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C ने ऐसे एंड्रॉयड ऐप्स को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन ऐप्स को डाउनलोड करने के बाद फोन की संवेदनशील जानकारी खतरे में पड़ सकती है और बैंकिंग या UPI फ्रॉड का जोखिम बढ़ सकता है।
साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर राहुल मिश्रा के मुताबिक, ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापन चलाते हैं, जिनमें यूजर की उत्सुकता बढ़ाकर उसे किसी संदिग्ध ऐप तक पहुंचाया जाता है। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद व्यक्ति को दूसरी वेबसाइट पर भेजा जा सकता है। इसके बाद वहां ऐप डाउनलोड करने के लिए APK फाइल उपलब्ध कराई जाती है। अगर यूजर इसे फोन में इंस्टॉल कर लेता है तो ऐप कई तरह की परमिशन मांग सकता है। इन्हीं परमिशन का गलत इस्तेमाल करके साइबर अपराधी फोन और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
I4C ने भी ऐसे संदिग्ध एंड्रॉयड ऐप्स को लेकर चेतावनी दी है। सलाह में कहा गया है कि अनजान स्रोत से ऐप इंस्टॉल करने पर फोन के साथ-साथ वित्तीय खातों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
APK और Accessibility परमिशन क्यों खतरनाक हो सकती है
APK यानी Android Package Kit एक ऐसी फाइल होती है, जिसके जरिए एंड्रॉयड फोन में ऐप इंस्टॉल किया जा सकता है। आम तौर पर यूजर आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करता है, लेकिन APK के जरिए किसी दूसरी जगह से भी ऐप फोन में डाला जा सकता है। यही तरीका साइबर ठगों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
खास सावधानी Accessibility परमिशन को लेकर जरूरी है। यह फोन में मौजूद एक संवेदनशील सुविधा है, जिसके जरिए किसी ऐप को स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी समझने और कुछ यूजर इंटरफेस गतिविधियां करने की क्षमता मिल सकती है। इसलिए किसी अनजान ऐप को यह एक्सेस देने से पहले यह जांचना जरूरी है कि उसे इसकी वास्तव में जरूरत भी है या नहीं। इसी तरह SMS, फोन, बैंकिंग या दूसरी संवेदनशील परमिशन भी बिना जरूरत किसी ऐप को नहीं देनी चाहिए। सुरक्षित रहने के लिए ऐप हमेशा आधिकारिक स्टोर से डाउनलोड करें। डेवलपर की जानकारी, डाउनलोड की संख्या और यूजर रिव्यू भी जांचें। अगर कोई ऐप जरूरी परमिशन दिए बिना काम करने से मना करता है, तो उसे इंस्टॉल रखने के बजाय हटा देना बेहतर है।
फोन में संदिग्ध ऐप का पता चले तो तुरंत क्या करें
अगर फोन में कोई अनजान ऐप दिखाई दे या उसकी गतिविधि अचानक बदल जाए तो उसे नजरअंदाज न करें। सबसे पहले उस ऐप की दी गई परमिशन जांचें और जरूरत न होने पर उन्हें बंद करें। Accessibility एक्सेस भी तुरंत ऑफ करें और संदिग्ध ऐप को अनइंस्टॉल कर दें। इसके बाद बैंकिंग ऐप और UPI से जुड़े खातों की गतिविधियां ध्यान से देखें। कोई अनजान ट्रांजैक्शन या दूसरी संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत बैंक को जानकारी दें। जरूरत पड़ने पर बैंक खाते को अस्थायी रूप से सुरक्षित कराने के लिए बैंक से संपर्क किया जा सकता है। ईमेल, बैंकिंग और दूसरे महत्वपूर्ण अकाउंट के पासवर्ड भी बदलें और जहां संभव हो वहां 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें। सिर्फ ऐप डिलीट कर देना हर स्थिति में पर्याप्त नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब उसे पहले संवेदनशील परमिशन दी गई हो। इसलिए परमिशन की दोबारा जांच करना जरूरी है।
अगर ठगी हो चुकी है या बैंक/UPI से पैसे निकलने की आशंका है तो बिना देरी किए साइबर क्राइम हेल्पलाइन *1930* पर संपर्क करें। ऑनलाइन शिकायत *cybercrime.gov.in* के जरिए भी दर्ज की जा सकती है। बैंक या संबंधित UPI सेवा को भी तुरंत सूचना दें। ध्यान रखें, सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन फर्जी नहीं होता, लेकिन किसी भी विज्ञापन पर बिना जांच किए क्लिक करना या उसके जरिए ऐप इंस्टॉल करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर वे लिंक अधिक सावधानी मांगते हैं जो यूजर को डर, लालच या जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के लिए प्रेरित करें।

