भरोसा टूटा तो जीवन आसान नहीं, खुद पर से विश्वास उठ जाता है : श्रेयांशप्रभ सागर

कसम भी भरोसा है, विश्वास बनाए रखें और शक को तत्काल दूर करें

राजनांदगांव(दैनिक पहुना)। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि जीवन में विश्वास का बहुत महत्व है। व्यक्ति भरोसे के आधार पर ही रिश्तों और जीवन को आगे बढ़ाता है। इसलिए भरोसे को कभी टूटने नहीं देना चाहिए। भरोसा टूटने पर व्यक्ति का खुद पर से भी विश्वास उठ सकता है। उन्होंने कहा कि कभी झगड़े की शुरुआत नहीं करनी चाहिए, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि गलत का साथ दिया जाए। भगवान पर भरोसा रखते हुए सत्य और सही मार्ग पर चलना चाहिए। जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने कहा कि हर आत्मा में परमात्मा का वास है। इसलिए परमात्मा पर विश्वास रखें और इस विश्वास को कभी न तोड़ें। जिस व्यक्ति पर भरोसा हो, उस पर अनावश्यक शक नहीं करना चाहिए। यदि किसी बात को लेकर संदेह उत्पन्न हो तो उसे बातचीत और पूछताछ के माध्यम से तत्काल दूर कर लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गलतफहमी और भरोसे के बीच शक एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि व्यक्ति हमेशा शक में रहेगा तो वह किसी के साथ भी अच्छे संबंध नहीं बना पाएगा। विशेष रूप से बच्चों के प्रति शक को बढ़ने नहीं देना चाहिए। उनसे बातचीत कर अपनी शंकाओं का समाधान करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि संसार में रहते हुए यह संकल्प रखें कि किसी के प्रति गलत विचार नहीं रखेंगे। यदि हम किसी के बारे में गलत सोचते हैं तो यह भी समझना चाहिए कि हर आत्मा में परमात्मा का वास है। इसलिए मन में सकारात्मक और निर्मल भाव रखना ही जीवन को सही दिशा देता है।

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