अरब सागर में ऑपरेशन सिंदूर का जश्न, INS विक्रांत पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह….

आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पीएम मोदी देश के अलग अलग राज्यों मे दौरे कर रहे हैं। गुजरात के बाद वे इस वक्त बिहार के दौरे पर हैं। आज उनके दौरे का दूसरा दिन है। वहीं दूसरी तरफ गृहमंत्री अमित शाह भी जम्मू कश्मीर के अपने दौरे पर हैं। वहां उन्होंने पाकिस्तानी गोलीबारी में जान माल का नुकसान झेलने वाले पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें सरकारी नौकरी से जुड़ा नियुक्ति पत्र दिया। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर पहुंचे। यहां उन्होंने नौसैनिकों से मुलाकात की और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। उन्होंने नौसैनिकों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि आज INS Vikrant पर अपने नौसैन्य योद्धाओं के बीच आकर मुझे बड़ी खुशी हो रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर मौजूद सैनिको से कहा, जब मैं भारत की समुद्री शक्ति के गौरव आईएनएस विक्रांत पर खड़ा हूं, तो मेरे अंदर खुशी के साथ-साथ एक गर्व और विश्वास का भाव भी है कि जब तक राष्ट्र की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा आपके मजबूत हाथों में है, तब तक भारत को कोई तिरछी निगाहों से देख नहीं सकता। उन्होंने आगे कहा, वैसे भी ‘विक्रांत’ का अर्थ ही होता है- अदम्य साहस, और अपराजेय शक्ति। आज आप सभी जांबाजों के बीच खड़े होकर मैं इस नाम के अर्थ को साकार होता देख रहा हूं। आपकी आंखों में जो दृढ़ता है, उसमें भारत की असली शक्ति झलकती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ख़ास थी INS विक्रांत की भूमिका

बता दें कि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने अपने कैरियर बैटल ग्रुप के साथ उत्तरी अरब सागर में फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट किया था। इस ग्रुप का नेतृत्व INS विक्रांत ने किया, जिसमें 8 से 10 वॉरशिप्स, जैसे डिस्ट्रॉयर और स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, शामिल थे। इस तैनाती ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि वह तनाव बढ़ाता है, तो भारतीय नौसेना न केवल उसके युद्धपोतों, बल्कि जमीनी ठिकानों को भी निशाना बना सकती है। नतीजतन, पाकिस्तानी नौसेना कराची नेवल बेस से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सकी और उसने सीजफायर की मांग की।

आखिर कितना बड़ा है INS विक्रांत?

INS विक्रांत को ‘समुद्र का शेर’ या ‘समुद्र में तैरता किला’ कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यह एयरक्राफ्ट कैरियर 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा और 59 मीटर ऊंचा है, जिसमें करीब 30,000 टन विशेष स्टील (DMR ग्रेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा आपूर्ति) का उपयोग हुआ है। यह एक तैरता हुआ हवाई अड्डा है, जो 30 से अधिक लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को ले जाने में सक्षम है। इसके डेक पर मिग-29K फाइटर जेट्स, कामोव हेलीकॉप्टर और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (ALH) तैनात किए जा सकते हैं।

भारत की शान क्यों है INS विक्रांत?

INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है, और यह सही मायनों में समुद्र में भारत का सबसे ताकतवर प्रहरी है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने तैयार किया, और इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि में किया गया। इसकी अनुमानित लागत लगभग 20,000 करोड़ रुपये है, और इसमें 75% तक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है।

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