डिजिटल डेस्क। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब नए आयुष्मान कार्ड आधार आधारित ई-केवाईसी के बाद ही जारी किए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इसके लिए बेनिफिशयरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (BIS-2.0) को लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत सभी लाभार्थियों की पहचान आधार ई-केवाईसी के माध्यम से अनिवार्य रूप से सत्यापित की जाएगी।
नए सदस्य जोड़ने का विकल्प भी समाप्त
इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड में नए सदस्य जोड़ने (एड मेंबर) का विकल्प भी समाप्त कर दिया गया है। अब केवल एसईसीसी-2011 के तहत शेष पात्र परिवारों में ही, निर्धारित नियमों के अनुसार नए सदस्यों को जोड़ा जा सकेगा।
ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर से कार्डों की निगरानी
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि संदिग्ध आयुष्मान कार्डों की पहचान स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट पोर्टल (SAFU BIS) के माध्यम से की जा रही है। एनएचए द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसे कार्डों की नियमित निगरानी की जाती है।
कार्ड स्वतः चिन्हित हो जाते हैं
इस तकनीक के जरिए संदिग्ध कार्ड स्वतः चिन्हित हो जाते हैं और तत्काल उन पर इलाज की सुविधा रोक दी जाती है। इसके बाद इन कार्डों की जांच ऑडिटर द्वारा कराई जाती है। जांच में सही पाए जाने वाले कार्डों को संदिग्ध श्रेणी से बाहर कर दिया जाता है।
61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं
अर्चना वर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 से अब तक जारी किए गए आयुष्मान कार्डों में से 61,932 कार्ड संदिग्ध पाए गए हैं। इनकी जांच जिला स्तर पर फील्ड इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (FIO) द्वारा की जा रही है। अब तक 48,435 कार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जा चुका है।
सूची भेजकर जांच के निर्देश दिए गए
उन्होंने बताया कि सभी जिलाधिकारियों (डीएम), मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को संदिग्ध कार्डों की सूची भेजकर जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर उसे हटा दिया गया है।




