ममता बनर्जी की हार से बांग्लादेश खुशः BJP की जीत पर कहा- अब भारत के साथ हमारे रिश्ते और अधिक मजूबत होंगे

Bangladesh Happy With Mamata Banerjee Defeat in Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इतिहास रचते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की है। कुल 294 सीटों में से बीजेपी ने 207 सीट पर जीत हासिल की है। आजादी के 75 साल बाद बंगाल में पहली बार बीजेपी सत्ता में आई है। इस जीत से सिर्फ बीजेपी और उसके चाहने वाले ही नहीं बल्कि बंगाल में भाजपा की जीत पर भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश भी गदगद है। बंगाल में ममता बनर्जी की हार से खुश बांग्लादेश ने कहा कि BJP की जीत से भारत के साथ हमारे रिश्ते और अधिक मजूबत होंगे।

बांग्लादेश की सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी पार्टी नेता जीजुल बारी हेलाल ने बंगाल चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी की हार और बीजेपी की ऐतिहासिक जीत का स्वागत किया। हेलाल ने उम्मीद जताई कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार से भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत होंगे। खासकर तीस्ता जल समझौते (Teesta Water Agreement) का रास्ता साफ होगा। उन्होंने शांति और संबंधों की मजबूती पर जोर दिया।

BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने ममता बनर्जी सरकार पर तीस्ता जल बंटवारे समझौते में देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि वह इसमें सबसे बड़ी रुकावट थी। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता बांग्लादेश सरकार और मोदी सरकार दोनों ही चाहते थे। हेलाल ने बांग्लादेश में सत्ता बदलने पर उम्मीद जताई कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और अधिक बेहतर होंगे।

ममता सरकार इस समझौते का हमेशा विरोध किया

बंगाल की सत्ता पर पिछले 15 साल से काबिज ममता बनर्जी ने इस समझौते का हमेशा विरोध किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार तीस्ता और फरक्का जल बंटवारे के समझौतों का विरोध करती रही हैं। उनके मुताबिक इसका सीधा असर राज्य के लोगों की आजीविका पर पड़ेगा। उनका तर्क है कि पहले ही तीस्ता नदी में पानी का प्रवाह कम हो चुका है। ऐसे में अगर बांग्लादेश के साथ अतिरिक्त पानी साझा किया गया तो उत्तर बंगाल में सिंचाई और पीने के पानी का संकट गहरा सकता है। साथ ही फरक्का बैराज से पानी मोड़ना कोलकाता पोर्ट की नौवहन क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है।

क्या है तीस्ता जल समझौता

दरअसल, तीस्ता जल समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच एक ऐसा समझौता है, जिसका उद्देश्य तीस्ता नदी के पानी का उचित बंटवारा करना है। यह नदी भारत के सिक्किम राज्य के हिमालय क्षेत्र से निकलती है। सिक्किम के बाद यह पश्चिम बंगाल से होकर बहती है और अंत में बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। यह बांग्लादेश की चौथी सबसे बड़ी नदी है। इस लंबी यात्रा के दौरान तीस्ता नदी की 83% यात्रा भारत में और 17% यात्रा बांग्लादेश में होती है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई सालों से विवाद है। बांग्लादेश तीस्ता के 50 फीसदी पानी पर अधिकार चाहता है। जबकि भारत खुद 55 फीसदी पानी चाहता है। 1983 में एक समझौता हुआ था जिसके तहत भारत को 39 और बांग्लादेश को 36 फीसदी पानी मिलता था, जबकि बाकी 25 फीसदी का बंटवारा तय नहीं था। 2011 में भारत सरकार और बांग्लादेश के बीच एक नई संधि होने वाली थी। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते का विरोध किया था।

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