टैरिफ पर भारत को तगड़ा झटका देंगे ट्रंपः फिर लगाएंगे भारी-भरकम Tariffs, देखें लिस्ट

Donald Trump New Tariffs On India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ पर भारत को तगड़ा झटका दे सकते हैं। जी हां.. डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर दुनिया पर टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में हैं। अमेरिका भारी-भरकम नया टैरिफ भारत (US New Tariff On India) पर लगा सकता है। अमेरिका कम से कम 10 फीसदी का टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। वहीं 12.5% टैरिफ रेट भी पहुंच सकता है। उनका ये प्रपोजल जबरन श्रम प्रथाओं की जांच के बाद आया है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US trade deal) की बातचीत के बीच ये प्रस्ताव लाया गया है। इसका असर दोनों देशों के व्यापार समझौता पर पड़ सकता है।

दरअसल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने भारत और चीन सहित 60 देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। यूएसटीआर का कहना है कि इन देशों ने कथित तौर पर जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लागू नहीं किए हैं। लिहाजा इससे अमेरिका को घाटा हो रहा है। लिहाजा इन देशों के खिलाफ टैरिफ लगाया जाए।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने जारी बयान में कहा कि 1974 के अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियां और कार्यप्रणालियां अमेरिकी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। यूएसटीआर के अनुसार इन देशों द्वारा जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को प्रभावी ढंग से रोकने में विफल रहने के कारण अमेरिकी कारोबार प्रभावित हो रहा है। लिहाजा इन देशों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

भारत-चीन समेत कई देशों पर 12.5 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक इस लिस्ट में भारत और चीन का नाम शामिल है। दोनों देशों के खिलाफ ट्रंप 12.5 फीसदी का टैरिफ लगा सकते हैं। इन दोनों देश के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से आने वाले सामानों पर भी 12.5 फीसदी का टैरिफ लगा सकता है। जबकि कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय यूनियन, ताइवान और ब्रिटेन समेत अन्य देशों से आयात पर 10 फीसदी की टैरिफ लागू हो सकता है।

मार्च में शुरू हुई थी जांच

यूएसटीआर ने बताया कि इस मामले की जांच 12 मार्च को शुरू की गई थी। जांच के दौरान करीब 60 गवाहों के बयान लिए गए और सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के दौरान लगभग 500 टिप्पणियां प्राप्त हुईं। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद एजेंसी ने अपने निष्कर्ष तैयार किए हैं। जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं होने से वैश्विक स्तर पर श्रम शोषण खत्म करने के प्रयास कमजोर पड़ते हैं। इससे कम लागत पर उत्पादन करने वाले उत्पादों को अनुचित लाभ मिलता है। बाजार की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है और उन कंपनियों को नुकसान पहुंचता है जो जबरन श्रम का उपयोग नहीं करती।

अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

कई व्यापारिक मतभेदों के बावजूद अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार हाल के वर्षों में 120 अरब डॉलर से अधिक के स्तर को पार कर चुका है। भारत और अमेरिका दोनों ही आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहरा चुके हैं।

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