बिलासपुर। न्यायधानी में रविवार को आयोजित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की सूबेदार, उपनिरीक्षक संवर्ग और प्लाटून कमांडर प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थियों को इस बार पारंपरिक सामान्य ज्ञान के साथ छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और तथ्य आधारित प्रश्नों का संतुलित मिश्रण देखने मिला। छै महीना के रांधे भात, जब खाबे तब ताते ताम…जैसे जनऊला ने परीक्षा कक्ष से बाहर निकलते ही सबसे अधिक चर्चा बटोरी। परीक्षार्थियों के मुताबिक पेपर न तो आसान था और न ही बेहद कठिन, बल्कि तैयारी की वास्तविक कसौटी साबित हुआ।
रविवार सुबह 10 से 12 बजे तक हुई इस परीक्षा में पंजीकृत 13,716 अभ्यर्थियों में से 12,407 ने परीक्षा दी, जबकि 1,310 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले मेटल डिटेक्टर से जांच, दस्तावेज सत्यापन और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
सीएमडी पीजी कालेज, रेलवे स्कूल परीक्षा केंद्र से परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र का स्तर कुल मिलाकर मध्यम रहा, लेकिन कई सवाल सीधे तथ्यों पर आधारित होने के कारण भ्रम की स्थिति भी बनी। छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान, गणित, भारतीय संविधान, इतिहास, भूगोल, सामान्य विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से संतुलित प्रश्न पूछे गए। प्रदेश की संस्कृति और परंपरा से जुड़े प्रश्नों ने भी खास ध्यान खींचा।
कई अभ्यर्थियों का कहना था कि करेंट अफेयर्स में पिछले एक वर्ष की घटनाओं पर अच्छी पकड़ रखने वालों को फायदा मिला। संविधान और इतिहास के कुछ प्रश्न अवधारणात्मक थे, जिनमें केवल रटने से काम नहीं चलता। परीक्षा समाप्त होने के बाद केंद्रों के बाहर उत्तरों पर चर्चा का दौर देर तक चलता रहा। अब अभ्यर्थियों की नजर आयोग की आधिकारिक उत्तर-कुंजी पर है, जिसके बाद संभावित कटआफ को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
जनउला ने दिलाई गांव की याद, संस्कृति से जुड़े सवालों की चर्चा
इस बार भी प्रश्नपत्र में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति से जुड़े सवालों ने अलग पहचान बनाई। विशेष रूप से जनउला (लोक पहेली) आधारित प्रश्न अभ्यर्थियों के बीच चर्चा का विषय रहे। कई परीक्षार्थियों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के प्रश्न यह संकेत देते हैं कि केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक समझ भी सफलता के लिए जरूरी है।
फैक्ट आधारित सवालों में उलझे अभ्यर्थी, विकल्पों ने बढ़ाया संशय
परीक्षार्थियों के अनुसार कई प्रश्न ऐसे थे जिनमें विकल्प लगभग सही प्रतीत हो रहे थे। विशेषकर इतिहास, संविधान और सामान्य ज्ञान के कुछ सवालों में सूक्ष्म अंतर पहचानना चुनौतीपूर्ण रहा। अच्छी तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों ने भी स्वीकार किया कि ऐसे प्रश्नों ने अंतिम उत्तर तय करने में अतिरिक्त समय लिया और पेपर का स्तर संतुलित बनाए रखा।
करंट अफेयर्स में एक साल की तैयारी वालों को मिला फायदा
अभ्यर्थियों का मानना है कि पिछले लगभग एक वर्ष की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और छत्तीसगढ़ से जुड़ी घटनाओं पर आधारित प्रश्नों की संख्या अच्छी रही। नियमित समाचार पढ़ने और मासिक करंट अफेयर्स का अध्ययन करने वाले परीक्षार्थियों को इन सवालों में बढ़त मिली। कई उम्मीदवारों ने कहा कि केवल स्थिर सामान्य ज्ञान के भरोसे बेहतर प्रदर्शन करना इस बार आसान नहीं था।
रेलवे स्कूल केंद्र को लेकर कई अभ्यर्थियों में असमंजस
रेलवे स्कूल नंबर एक, दो व प्रायमरी को भी केंद्र बनाया गया था। एक दूसरे से इनकी दूरी लगभग 500 मीटर से एक किलो मीटर है। ऐसे में कई अभ्यर्थी अलग-अलग केंद्रों में पहुंच गए। जब उन्हें पता चला तो वे असमंजस में आ गए आखिर कहां जाएं। हालांकि अच्छी बात यह रही कि एक भी अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित नहीं हुए। सड़क पर स्कूल का संकेतक भी नहीं होने के चलते यह स्थिति हर बार बनती है।

