बिलासपुर। हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि कोई उम्मीदवार अपनी गलती का लाभ उठाकर नियुक्ति या समायोजन का दावा नहीं कर सकता। यदि विज्ञापन में संबंधित जिले और विषय में पद उपलब्ध नहीं है और अभ्यर्थी ने आवेदन किया है, तो उसे दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाने की बाध्यता नहीं है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने मोनिका भोंसले बनाम छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल व अन्य याचिका की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी।
रायपुर में नहीं था पद, फिर भी किया आवेदन
मामला वर्ष 2017 की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। याचिकाकर्ता मोनिका भोंसले, जो सहायक शिक्षक विज्ञान के पद पर कार्यरत हैं, ने रायपुर जिले के लिए व्याख्याता (विज्ञान) पद के लिए आवेदन किया था। हालांकि, उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए नहीं बुलाया गया क्योंकि विज्ञापन में रायपुर जिले में व्याख्याता (विज्ञान) का कोई पद उपलब्ध नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित पद ही उपलब्ध नहीं था, तो दस्तावेज सत्यापन के लिए नहीं बुलाना गलत नहीं कहा जा सकता।
खारिज कर दी गई मोनिका भोंसले की याचिका
अदालत ने यह भी माना कि किसी विशेष जिले और विषय के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार को बाद में अपनी सुविधा के अनुसार दूसरे जिले या विषय के पद पर समायोजित करने के लिए प्रशासन को बाध्य नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर मोनिका भोंसले की याचिका खारिज कर दी गई।

