दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में ट्रांसफर हो सकती है। गुरुवार, 10 सितंबर को अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह मामले को अपने पास ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल अपनी सुनवाई को लैंड यूज से जुड़े पहलू पर केंद्रित रखना चाहता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा, “हम पूरे देश को लेकर चिंतित हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि करीब दो महीने बाद यह समझ में आ सकेगा कि अदालत इस मामले में क्या करना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवासीय इलाकों में ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जिनसे लोगों के आने-जाने में परेशानी हो या बच्चों के खेलने तक की जगह न बचे। कोर्ट ने लैंड यूज और आवासीय क्षेत्रों के नियोजन को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे इलाकों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से जुड़े मामले को वह दिल्ली हाई कोर्ट से अपने पास ट्रांसफर कर सकता है। इससे मामले की सुनवाई को व्यापक स्तर पर देखने और लैंड यूज से जुड़े पहलुओं की जांच का रास्ता खुल सकता है।
कैसे गिरी इमारत?
साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं। मामले में पुलिस ने इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, उनके पति और वायुसेना से रिटायर्ड 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता और उनके बेटे 52 वर्षीय महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है।
दिल्ली पुलिस ने बुधवार को बताया था कि एक आरोपी से पूछताछ में इमारत गिरने की वजह को लेकर अहम जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, इमारत के भूतल पर दुकान बनाने के लिए एक दीवार तोड़ी गई थी। आरोप है कि दीवार हटाए जाने के बाद इमारत का ढांचा कमजोर हुआ और इसके चलते पूरी पांच मंजिला इमारत ढह गई।

