धर्म डेस्क। दीवाली के पर्व का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस पर्व के आने से पहले ही घरों की सफाई शुरू हो जाती है। कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि घर की सफाई के दौरान हम कुछ चीजों को घर से बाहर करने की बजाय उन्हें घर में ही रख लेते हैं।
अगर आप भी इस तरह की गलती कर रहे हैं, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे घर में मां लक्ष्मी का आगमन नहीं होगा और नकारात्मकता एवं दरिद्रता का वास होगा। यह जानकर आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर दीवाली से पहले किन चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए।
इन चीजों को घर से करें बाहर
दीवाली पर मां लक्ष्मी के स्वागत और घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए, वास्तु शास्त्र के अनुसार इन अशुभ वस्तुओं को तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए।
खंडित मूर्तियां और तस्वीरें- वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में खंडित(टूटी हुई) मूर्तियां और तस्वीरें रखना शुभ नहीं माना जाता है। इस तरह की मूर्तियों और तस्वीरों के मंदिर में होने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बाधित होती है। इसलिए दीवाली से पहले खंडित मूर्तियों और तस्वीरों को किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए या फिर पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए।
बंद या टूटी घड़ियां- घर में बंद या टूटी घड़ियां रखने की भी मनाही है। इस तरह की घड़ियों को तरक्की में बाधा और दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए दीवाली की सफाई के दौरान बंद या टूटी घड़ियों को घर से बाहर करें या उन्हें ठीक करवाएं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में बंद या टूटी घड़ी रखने से परिवार के सदस्यों की तरक्की में बाधा आ सकती है।
पुराने और फटे जूते-चप्पल- वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि घर में फटे-पुराने जूते-चप्पल रखने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका बुरा प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है। इसलिए घर में भूलकर भी फटे-पुराने जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए। अगर आपके घर में भी इस तरह के जूते-चप्पल रखे हैं, तो उन्हें आज ही घर से बाहर कर दें।
टूटा हुआ कांच और बर्तन- इसके अलावा घर में चटके हुए बर्तन और टूटा हुआ शीशा भी नहीं रखना चाहिए। इससे वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। दरिद्रता से बचने के लिए इन्हें तुरंत हटा दें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। dainik pahuna यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

