उपकारी का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए : समयप्रभ जी

राजनांदगांव(दैनिक पहुना)। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य मुनि समयप्रभ सागर जी ने कहा कि जीवन में किसी व्यक्ति द्वारा किए गए उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए। उपकारी के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए और अवसर मिलने पर उसके उपकार का प्रतिदान भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों की सहायता करना मानवीय गुण है, लेकिन सहयोग ऐसा होना चाहिए कि उसका प्रदर्शन न हो।

ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान मुनि श्री समयप्रभ सागर जी ने श्रद्धालुओं को जीवन में सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा दी। मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि मुनि श्री ने कहा कि जल्दबाजी में किया गया कार्य अक्सर गलतियों का कारण बनता है। इसलिए किसी भी काम को उतावलेपन में करने के बजाय धैर्य और विवेक के साथ पूरा करना चाहिए। उन्होंने आत्मप्रशंसा से बचने की सीख भी दी।

मुनि श्री ने कहा कि संत अपनी प्रवृत्ति नहीं छोड़ता, उसी प्रकार दुर्जन भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता। उपकारी व्यक्ति भी अपने स्वभाव के अनुरूप दूसरों की मदद करता है। उन्होंने कहा कि किसी का उपकार मिलने पर उसे याद रखना और उसके प्रति कृतज्ञ बने रहना जरूरी है। उन्होंने साधर्मियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साधर्मी दया का नहीं, बल्कि भक्ति और सम्मान का पात्र होता है। किसी जरूरतमंद की सहायता करते समय इसका प्रचार नहीं करना चाहिए। निस्वार्थ भाव से किया गया सहयोग ही सच्ची सेवा है। मुनि श्री के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को विनम्रता, कृतज्ञता और परोपकार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

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