सरकार ने दिया दीवाली का तोहफा, मांझियों और चालकियों का बढ़ाया मानदेय, अब हुआ इतना

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक बस्तर अंचल में आयोजित पारंपरिक ‘मुरिया दरबार’ के मंच से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्र की जनजातीय व्यवस्था के प्रमुख स्तंभों को दीपावली की बड़ी सौगात दी है। बस्तर की पारंपरिक प्रशासनिक एवं सामाजिक व्यवस्था का संचालन करने वाले मांझियों और चालकियों के मासिक मानदेय में राज्य सरकार ने भारी इजाफा करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के तहत मांझियों को अब 2,000 रुपये के स्थान पर 5,000 रुपये मासिक मिलेंगे, जबकि चालकियों का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में हुआ बड़ा एलान

यह महत्वपूर्ण फैसला उस गरिमामयी अवसर पर सामने आया जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं मुरिया दरबार में उपस्थित थीं। बस्तर की सदियों पुरानी लोकतांत्रिक व सामुदायिक प्रणाली के मुखियाओं के सम्मान में लिया गया यह निर्णय स्थानीय जनजातीय नेतृत्व को सीधा आर्थिक संबल प्रदान करेगा। शासन के इस कदम को जनजातीय संस्कृति, उनकी स्वशासी परंपराओं और धरोहर के संरक्षण के प्रति एक ठोस प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

मांझियों के भत्ते में प्रति माह 3,000 रुपये की सीधी बढ़ोतरी

बस्तर के ग्रामीण और सामुदायिक ताने-बाने में मांझी का स्थान बेहद आदरणीय और महत्वपूर्ण माना जाता है। वे न केवल सामाजिक विवादों के निपटारे में अगुवा की भूमिका निभाते हैं, बल्कि पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक-आस्थाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखने का दायित्व भी संभालते हैं। लंबे समय से उनके मानदेय को बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही थी। अब प्रति माह सीधे 3,000 रुपये की वृद्धि होने से मांझियों को अपने दायित्वों के निर्वहन में आर्थिक राहत मिलेगी।

चालकियों का मासिक मानदेय भी 2,000 रुपये बढ़ा

पारंपरिक व्यवस्था में मांझियों के सहयोगी के रूप में जिम्मेदारी निभाने वाले चालकियों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने चालकियों के खाते में जाने वाली मासिक राशि में 2,000 रुपये का इजाफा करते हुए इसे 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये कर दिया है। इस दोहरे फैसले से बस्तर संभाग के दूरदराज अंचलों में सामाजिक व्यवस्था संभालने वाले दोनों प्रमुख वर्गों में उत्साह का माहौल है।

पारंपरिक स्वशासन संस्थाओं को मिला सम्मान

बस्तर के प्रसिद्ध दशहरे के समापन अवसर पर लगने वाला ‘मुरिया दरबार’ ऐतिहासिक रूप से शासक और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का सर्वोच्च मंच रहा है। इस ऐतिहासिक दरबार में पारंपरिक नेतृत्व के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करना यह दर्शाता है कि सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ पारंपरिक ग्राम-व्यवस्था और स्थानीय प्रतिनिधियों के योगदान को भी बराबर अहमियत दे रही है।

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