खड़गे का पीएम मोदी के SRCC स्पीच पर तंज, बोले – नाकामी छिपाने के लिए जुमले लाए, देश का युवा अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी के दिल्ली स्थित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में छात्रों से किए संवाद को एक राजनीतिक भाषण बताया। खड़गे ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि मोदी जी कल दिल्ली विश्वविद्यालय के SRCC में गए। यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का अवसर था। लेकिन अफसोस, युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय भाषण फिर एक राजनीतिक प्रचार में बदल गया।

कभी नाराज फूफा तो कभी दिमागी और अर्बन नक्सल। जुमले बदलते रहते हैं, पर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियां नहीं बदलती। खड़गे ने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री जी, आउटरीच तभी करनी पड़ती है, जब आप आउट ऑफ रीच हो जाते हैं। प्रधानमंत्री जी ने अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाया। देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है।

5 सितंबर: मोदी ने श्रीराम कॉलेज में कहा– मेरी होम्योपैथी गोली से दिमागी नक्सल बौखला गए

पीएम मोदी शनिवार को श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) कॉलेज के 100वें स्थापना दिवस सामरोह में शामिल हुए। उन्होंने जेन-जी छात्रों के बीच 48 मिनट स्पीच दी।

धुरंधर भले न हों, पर धूम मचाई: पीएम मोदी ने कहा कि आपकी लैंग्वेज में कहूं तो इस कॉलेज के पूर्व छात्र OG (ओरिजिनल गैंग्स्टर) हैं। वे धुरंधर भले न हों, पर दुनियाभर में धूम तो मचाई है।

दिमागी नक्सल का जिक्र: मोदी ने यहां अपनी लाल किले पर दी गई 15 अगस्त की स्पीच का जिक्र भी किया। वे बोले- मैंने उस दिन ‘दिमागी नक्सल’ कहकर होम्योपैथी की ऐसी गोली दी, जिससे सारे विरोधी बौखलाने लगे।

तंज कसने वाले ‘नाराज फूफा’: पीएम ने कहा- हर बात पर ‘इसकी क्या जरूरत है’ कहने वाले लोग ‘नाराज फूफा’ हैं। इनका एक ही डायलॉग होता है, इसकी क्या जरूरत है। इन लोगों ने बुलेट ट्रेन, यूपीआई और नई संसद जैसे कामों पर भी सवाल उठाया।

2013 के हालात से भारत काफी आगे आया: 2013 में बैंकिंग सिस्टम तबाह कर दिया गया था। 2008 में मुंबई में आतंकी हमला हुआ, लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।

खड़गे बोले- मोदी-शाह अगर दलित होते तो क्या ऐसे चुप रहते

हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अब वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। खड़गे ने कहा कि अगर मोदी दलित होते और उनके साथ ऐसा होता तो क्या वे तब भी ऐसे ही चुप रहते।

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