बीएनसी मिल की 54 एकड़ जमीन पर फिर दौड़ेंगी मशीनें! राजनांदगांव में टेक्सटाइल यूनिट की मांग

अशोक चौधरी बोले—बीएनसी मिल राजनांदगांव की पहचान, तैयार योजना का अवलोकन कर आगे बढ़ाएं काम

राजनांदगांव(दैनिक पहुना)। छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज किशोर सिंह के बीच हुई चर्चा का भारतीय जनता पार्टी के नेता अशोक चौधरी ने स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश में प्रस्तावित नई टेक्सटाइल यूनिट में से एक उद्योग शहर में स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि इससे शहर की ऐतिहासिक औद्योगिक पहचान को पुनर्जीवन मिलेगा और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। श्री चौधरी ने कहा कि नांदगांव की औद्योगिक पहचान का गौरवशाली इतिहास रहा है। जब देश में उद्योगों की संख्या बेहद कम थी, तब राजा बलराम दास ने वर्ष 1887 में राजनांदगांव में बीएनसी मिल की स्थापना की शुरुआत की थी। इसका पूरा नाम बंगाल नागपुर कॉटन मिल था। उन्होंने बताया कि बंगाल की सीमा से नागपुर तक स्थापित होने वाली प्रमुख कॉटन मिल होने के कारण इसका नाम बीएनसी मिल रखा गया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में अव्यवस्थाओं के कारण बीएनसी मिल बंद हो गई। उस समय मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुल तीन कपड़ा मिलें बंद हुई थीं। वहीं बुरहानपुर में एक मिल को सूत कताई यूनिट के रूप में दोबारा शुरू किया गया, जहां वर्तमान में करीब 6 हजार मजदूरों को रोजगार मिलने की बात कही गई है।

श्री चौधरी ने बताया कि बीएनसी मिल परिसर में करीब 54 एकड़ जमीन मिल स्थापना के लिए उपलब्ध है, जो वर्तमान में एनटीपीसी के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि यदि एनटीपीसी के माध्यम से टेक्सटाइल यूनिट स्थापित की जाती है तो राजनांदगांव इसके लिए उपयुक्त स्थान साबित हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आग्रह किया कि ऐतिहासिक पहचान रही बीएनसी मिल परिसर में टेक्सटाइल यूनिट स्थापित करने पर प्राथमिकता से विचार किया जाए। इससे शहर को औद्योगिक गौरव वापस मिलेगा और शुरुआती चरण में करीब 1500 लोगों को रोजगार मिल सकता है। भविष्य में उत्पादन और विस्तार के साथ रोजगार के अवसर और बढ़ाए जा सकते हैं।

अशोक चौधरी ने कहा कि बीएनसी मिल के कार्यालय में इस संबंध में पूरी योजना तैयार है। मुख्यमंत्री एवं संबंधित विभाग इस योजना का अवलोकन कर आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार राजनांदगांव की ऐतिहासिक औद्योगिक विरासत को ध्यान में रखते हुए टेक्सटाइल उद्योग की सौगात देगी।

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