धार। “मां…. यदि मुझे छोड़ना ही था तो नौ महीने अपनी कोख में क्यों रखा। यदि मेरी जिंदगी की शुरुआत सड़क किनारे तड़पकर खत्म होनी थी, तो मुझे इस दुनिया में क्यों लाया और क्यों लावारिस की तरह छोड़ दिया।
नालछा थाना क्षेत्र के ग्राम बगड़ी फाटा में गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे सड़क किनारे मिले नवजात की तस्वीर हर किसी के मन में यही सवाल छोड़ गई। बगड़ी फाटे मार्ग पर कपड़े में लिपटा मासूम सड़क किनारे पड़ा रो रहा था। उसके नन्हें शरीर पर चींटियां रेंग रही थीं। वह खुद को बचाने के लिए सिर्फ रो सकता था।
किस्मत अच्छी रही कि उसकी आवाज भंगार बिन रहे, भेरु परमार नामक एक व्यक्ति तक पहुंच गई और दौड़कर मौके पर पहुंचे। कपड़ा हटाया तो भीतर एक नवजात जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता मिला। उन्होंने तत्काल अाली गांव के सरपंच राहुल राणा को सूचना दी। कुछ ही देर में ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंच गई। डायल-112 की मदद से नवजात को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डाक्टरों ने उसका उपचार शुरु किया। समय पर मदद मिलने से उसकी जान बच गई है। फिलहाल बच्चे को एसएनसीयू में रखा गया है, जहां उसका उपचार जारी है।
जन्म के दो घंटे बाद ही छोड़ दिया
डाक्टरों ने बताया कि बच्चे को 72 घंटे के आब्जर्वेशन में रखा गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि उसका जन्म करीब दो घंटे पहले ही हुआ था। उसकी नाल भी नहीं कटी थी। नवजात का वजन 1.740 किलोग्राम है और फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।
अब तलाश उस शख्स की, जिसने ममता को शर्मसार किया
नालछा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है। पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि आखिर किसने जन्म के कुछ ही समय बाद इस मासूम को सड़क किनारे छोड़ दिया। आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई जा रही है।
बच्चे को सुरक्षित ही रखने का प्रयास कर रहे हैं
बच्चे का वजन एक किलो, 740 ग्राम है। सुबह तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर था। अस्पताल स्टाफ बच्चे की सेहत का ध्यान रख रही है। हमारे तरफ से बच्चे को सुरक्षित ही रखने का प्रयास कर रहे है। यदि बच्चे का वजन दो किलो के ऊपर हो जाता है तो बेहद अच्छा रहेगा। फिलहाल 24 घंटे बच्चे की देखभाल की जा रही है और 72 घंटे तक आब्जर्वेशन में रखा जाएगा। जन्म के दो घंटे बाद ही उसे सड़क पर छोड़ दिया था। -डा. मुकुंद बर्मन, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, धार

