
ट्रेवल डेस्टिनेशन। यह पर्यटन का पीक टाइम है। गर्मी की छुट्टियां कई जगह घोषित तो कहीं-कहीं शुरू होने को हैं। शादियों का सीजन धूमधाम से जारी है तो उधर, चारधाम की यात्रा भी शुरू हो गई है। मौज-मस्ती और सैर-सपाटे के लिए सैलानियों ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
हालांकि, आम दिनों में ये तैयारियां कुछ पहले ही हो जाती थीं, लेकिन इस वर्ष दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्ध और अन्य क्षेत्रों में बने युद्ध जैसे हालातों ने लोगों को अपनी वेकेशंस को री-प्लान करने को मजबूर कर दिया है। सुरक्षा को लेकर उपजी चिंताओं के साथ-साथ रही-सही कसर बढ़ते एयर फेयर ने पूरी कर दी है।
इसका असर ये हुआ है कि फॉरेन ट्रिप के लिए होटल और एयर टिकट आदि बुकिंग करा चुके लोगों ने प्लान कैंसिल कर अपना रुख डोमेस्टिक डेस्टिनेशंस की ओर करना शुरू कर दिया है।
भाने लगा अब भारत
फेडरेशन आफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म एंड हास्पिटैलिटी और अन्य उद्योग निकायों के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 तक अंतरराष्ट्रीय यात्रा की मांग में पिछले वर्ष की तुलना में 15% से 20% की गिरावट दर्ज की गई है।
पश्चिम एशिया संकट और डालर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत के कारण विदेश यात्रा के पैकेज 20% से 25% महंगे हो गए हैं। धनी भारतीयों के लिए अब सुरक्षा और सुगमता सबसे बड़े कारक बन गए हैं, जिससे वे पश्चिम एशिया या यूरोप के बजाय भारत के भीतर ही सुरक्षित लग्जरी ठिकानों को चुन रहे हैं।
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विदेश से टक्कर लेती देसी लोकेशन
इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध ने पश्चिम एशिया में भले ही कई तरह के संकट पैदा कर दिए हैं, लेकिन डोमेस्टिक टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए ये स्थिति ‘ब्लेसिंग्स इन डिस्गाइज्ड’ सरीखी ही है। ट्रेवल प्लानर्स ने भी विदेशी यात्रा को तरजीह देने वाले इस वर्ग को रिझाने के लिए देश के भीतर ही ‘फॉरेन टाइप लोकेशन’ के विकल्प उपलब्ध कराने शुरू कर दिए हैं।
साफ सुथरे सी-बीच, जैव विविधता और वाटर स्पोर्ट्स के लिए मालदीव जाने की चाह रखने वालों को विकल्प के तौर पर अंडमान-निकोबार का पैकेज दिया जा रहा है, तो मलेशिया जाने वालों के लिए केरलम का मुन्नार उपलब्ध है। हरियाली और खूबसूरत पहाड़ियों वाले स्विट्जरलैंड के विकल्प में हिमाचल का खज्जियार, उत्तराखंड का हर्षिल, औली, कौसानी, चोपता और कश्मीर का गुलमर्ग उपलब्ध है तो स्कॉटलैंड की चाह रखने वालों के लिए हिमाचल का मंडी मौजूद है।
अल्ट्रा-लग्जरी अनुभव की तलाश
हालिया पर्यटन रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय पर्यटन क्षेत्र में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव आया है। विशेष रूप से धनी भारतीयों के व्यवहार में एक परिवर्तन देखने को मिला है। धनी पर्यटक अब विदेश जाने के बजाय भारत में ही ‘अल्ट्रा-लग्जरी’ अनुभव तलाश रहे हैं।
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लग्जरी होटल उद्योग के राजस्व में वित्त वर्ष 2026 में 13-14 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। धनी भारतीय अब राजस्थान के पुनर्निर्मित महलों, निजी विला और ऐतिहासिक संपत्तियों में प्राइवेट स्टे को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, लग्जरी यात्रा बाजार में कस्टमाइज्ड और प्राइवेट वेकेशन सेगमेंट सबसे तेजी से बढ़ रहा है। धनी परिवार अब प्राइवेट जेट्स और याच के जरिए अंडमान के निजी द्वीपों या लद्दाख के दूरदराज के क्षेत्रों में जाना पसंद कर रहे हैं!
टूरिज्म के नए उभरते क्षेत्र
पारंपरिक पर्यटन के अलावा टूरिज्म के क्षेत्र में कुछ नए बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं…
- वेलनेस रिट्रीट- कोविड के बाद भारतीयों में वेलनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसने वेकेशन के नए क्षेत्र ग्लो-केशन को जन्म दिया है। केरलम व कुर्ग में वेलनेस रिट्रीट के लिए पहुंचने वालों की संख्या काफी बढ़ी है।
- वर्क-केशन- यंग जेनेरेशन में वेकेशन की जगह वर्क-केशन मनाने का प्रचलन बढ़ा है। इसमें किसी शांत अन-एक्सप्लोर्ड डेस्टिनेशन के किसी होमस्टे में सप्ताह भर का लंबा प्रवास होता है, जहां काम और छुट्टियों को साथ साथ एंज्वाय किया जाता है।
- स्टे-केशन- अपने शहर से दूर न जाकर किसी लग्जरी होटल में सप्ताहांत बिताने का प्रचलन। यह युवा पेशेवरों, विशेषकर कामकाजी दंपतियों में काफी पसंद किया जा रहा है।

