Technology Desk – आज के समय में स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। कॉलिंग और मैसेजिंग से आगे बढ़कर अब मोबाइल फोन बैंकिंग, शॉपिंग, ऑफिस के काम और निजी जानकारी संभालने का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है।

लेकिन स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा का खतरा भी बढ़ रहा है। अगर फोन खो जाए या हैक हो जाए तो सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि उससे जुड़ी पूरी डिजिटल जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
भारत में स्मार्टफोन बन रहे डिजिटल वॉल्ट
साइबर सिक्योरिटी कंपनी Kaspersky की एशिया-प्रशांत (APAC) सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में स्मार्टफोन तेजी से डिजिटल वॉल्ट यानी डिजिटल तिजोरी की तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
लोग अपने मोबाइल में बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड, निजी दस्तावेज, फोटो और ऑफिस से जुड़ा डेटा तक सुरक्षित रखने लगे हैं। हालांकि, स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के मुकाबले सुरक्षा के तरीके उतनी तेजी से मजबूत नहीं हो पाए हैं।
फोन में सेव रहती है बैंकिंग और पासवर्ड की जानकारी
आज ज्यादातर लोग ऑनलाइन बैंकिंग, UPI, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन शॉपिंग के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में फोन में बैंक से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी सेव रहती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार:
- करीब 38 प्रतिशत भारतीय यूजर्स अपने फोन में बैंकिंग डिटेल्स रखते हैं।
- लगभग 34 प्रतिशत लोग पासवर्ड और लॉगिन क्रेडेंशियल मोबाइल में सेव कर लेते हैं।
- यही वजह है कि साइबर अपराधी अब स्मार्टफोन को हमला करने के लिए आसान निशाना मान रहे हैं।
फर्जी ऐप्स के जरिए डेटा चोरी का खतरा
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। Rewardsteal और Thamera जैसे मालवेयर नकली कैशबैक, इनाम और आकर्षक ऑफर देने वाले ऐप्स के जरिए यूजर्स को निशाना बना सकते हैं। कई बार लोग बिना जांच किए ऐप्स को जरूरत से ज्यादा परमिशन दे देते हैं। इसके बाद ऐप्स यूजर की निजी जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
भारत में इंटरनेट का सबसे बड़ा सहारा स्मार्टफोन
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 60 प्रतिशत लोग इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए सबसे ज्यादा स्मार्टफोन पर निर्भर हैं।पहले लोग जरूरी जानकारी लैपटॉप, फाइल या डायरी में रखते थे, लेकिन अब स्मार्टफोन के दौर में ज्यादातर डेटा मोबाइल में ही मौजूद रहता है। फोन में फोटो, दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी, सोशल मीडिया अकाउंट और निजी बातचीत जैसी कई चीजें सेव रहती हैं। ऐसे में डेटा लीक का खतरा भी बढ़ जाता है।
ऑफिस का काम भी मोबाइल से हो रहा है
स्मार्टफोन अब केवल निजी इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में लोग ऑफिस के काम के लिए भी मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं। लोग फोन से ऑफिस ईमेल पढ़ते हैं, जरूरी फाइलें खोलते हैं और कंपनी के सिस्टम में लॉगिन करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार:
करीब 48 प्रतिशत भारतीय यूजर्स अपने फोन में ऑफिस ईमेल रखते हैं।
लगभग 27 प्रतिशत लोग मोबाइल से ऑफिस नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं।
अगर ऐसा फोन हैक हो जाता है तो निजी जानकारी के साथ-साथ कंपनी का गोपनीय डेटा भी खतरे में आ सकता है।
सोशल मीडिया अकाउंट भी बढ़ा रहे जोखिम
स्मार्टफोन में केवल बैंकिंग और ऑफिस डेटा ही नहीं रहता, बल्कि सोशल मीडिया अकाउंट, चैट हिस्ट्री, म्यूजिक, फिल्में, ई-बुक्स और गेमिंग अकाउंट भी जुड़े होते हैं। यानी एक ही डिवाइस में यूजर की आर्थिक, सामाजिक, निजी और प्रोफेशनल जिंदगी से जुड़ी कई जानकारियां मौजूद रहती हैं। यही कारण है कि साइबर अपराधियों के लिए स्मार्टफोन एक बड़ा लक्ष्य बन गया है।
स्मार्टफोन को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
स्मार्टफोन को सुरक्षित रखने के लिए यूजर्स को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
ऐप्स हमेशा आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
किसी भी ऐप को बिना जरूरत अतिरिक्त परमिशन न दें।
बैंकिंग जानकारी और पासवर्ड को सुरक्षित तरीके से संभालकर रखें।
फोन का नियमित बैकअप लेते रहें।
स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक सुरक्षा फीचर चालू रखें।
Find My Device जैसे फीचर को एक्टिव रखें।
मोबाइल सिक्योरिटी ऐप का इस्तेमाल करें और फोन को समय-समय पर अपडेट करते रहें।
आज स्मार्टफोन सिर्फ एक गैजेट नहीं रह गया है। यह लोगों की डिजिटल पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है, जिसमें बैंकिंग जानकारी से लेकर निजी डेटा और काम से जुड़ी फाइलें तक मौजूद रहती हैं।

