DPDP Act पर SC में सुनवाई, केंद्र को नोटिस ; डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने बताया पत्रकारिता की आजादी के लिए खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट और इससे जुड़े नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा। यह याचिका डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने दाखिल की है। एसोसिएशन का कहना है कि कानून में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता, स्वतंत्र रिपोर्टिंग और गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

DPDP Act के किन प्रावधानों को चुनौती?

DNPA ने 6 अक्टूबर को दाखिल याचिका में कानून के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें रद्द करने और सुनवाई के दौरान अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। एसोसिएशन में नेटवर्क18, NDTV और इंडियन एक्सप्रेस समेत 21 न्यूज पब्लिशर्स शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने डिजिटल माध्यमों पर लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए DPDP कानून बनाया है। हालांकि, न्यूज पब्लिशर्स का तर्क है कि इसके प्रावधान मीडिया की स्वतंत्रता और जनहित में खबरों के प्रकाशन के रास्ते में बाधा बन सकते हैं।

DNPA की 5 बड़ी आपत्तियां

  1. खोजी पत्रकारिता पर असर: याचिका के मुताबिक, निजी जानकारी इस्तेमाल करने से पहले सहमति लेना जरूरी होने पर भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं की जांच प्रभावित हो सकती है। संबंधित व्यक्ति को पहले सूचना मिलने से सबूत नष्ट होने का खतरा भी है।
  2. खबरें हटाने का दबाव: DNPA को आशंका है कि सहमति वापस लेने या निजी डेटा मिटाने की मांग के जरिए प्रकाशित खबरों को हटाने अथवा उनमें बदलाव कराने का दबाव बनाया जा सकता है।
  3. गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा: सरकार को जानकारी मांगने की शक्तियों से पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की पहचान उजागर होने का खतरा बताया गया है।
  4. RTI कानून में बदलाव: एसोसिएशन ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून की धारा 8(1)(j) में संशोधन को चुनौती देते हुए कहा कि इससे सार्वजनिक जानकारी तक नागरिकों की पहुंच प्रभावित हो सकती है।
  5. सरकारी शक्तियों पर सवाल: DNPA ने सरकारी संस्थाओं को मिली छूट और सूचना तक पहुंच सीमित करने की शक्तियों पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट कानूनी सीमाएं तय करने की मांग की है।

17 नवंबर को अगली सुनवाई

DNPA का तर्क है कि कानून में पत्रकारिता और जनहित की रिपोर्टिंग के लिए पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए। अब मामले में केंद्र सरकार के जवाब और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर रहेगी।

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