राजनांदगांव(दैनिक पहुना)। परम पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. के सुशिष्य मुनि श्री समयप्रभ सागर जी ने कहा कि तपस्वियों एवं अच्छे कार्य करने वालों की अनुमोदना करने में कभी भी कंजूसी नहीं करनी चाहिए। किसी भी अच्छे कार्य के लिए खुले दिल से अनुमोदना करने के साथ ही उसे करने वालों का बहुमान भी करना चाहिए। नेम भवन में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान मुनि श्री समयप्रभ जी ने कहा कि हम तपस्वियों और अच्छे कार्य करने वालों की अनुमोदना एवं बहुमान करने के लिए अक्सर बहाने बनाते हैं। वास्तव में बहाने हम नहीं, बल्कि हमारा मन बनाता है। हमारा मन बहानों का पुलिंदा है। तरकस में तीरों की कमी हो सकती है, लेकिन मन के बहाने कभी खत्म नहीं होते।
उन्होंने कहा कि हमें लब्धि मिली है, लेकिन विचार करना चाहिए कि हमने उसका कितना और किस प्रकार उपयोग किया है। जिनशासन में तपस्या एवं अच्छे कार्यों के लिए खुले दिल से सामूहिक अनुमोदना करने की परंपरा है। इसलिए अनुमोदना एवं बहुमान करने में कभी कंजूसी नहीं करनी चाहिए। प्रवचन के पश्चात नेम भवन में तपस्वियों का बहुमान किया गया। इस अवसर पर श्री जैन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी अजय सिंगी, ट्रस्टी भावेश बैद, ललित भंसाली, रोशन गोलछा, जीवनचंद बैद, चातुर्मास समिति के संयोजक पीयूष बैद सहित समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

