‘अब वक्त बदल गया है, टीचर क्लास में बच्चों को जलील नहीं कर सकते…,’ कक्षा में छात्रों को पनिशमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस

Supreme Court Hearing on Punishment of Students in Class: कक्षा में छात्रों को पनिश (सजा देने) करने को लेकर कोर्ट सुप्रीम में जोरदार सुनवाई हुई है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता (Sandeep Mehta) ने कहा कि अब वक्त बदल गया है। टीचर क्लास में बच्चों को जलील नहीं कर सकते। शायद हमारे दिनों में पिटाई करना आम बात थी।

दरअसल पूरा मामला एक छात्र की आत्महत्या से जुड़ा है। प्रोफेसर ने क्लास में सभी बच्चों के सामने छात्र को पनिशमेंट दी थी। साथी छात्रों के बीच सजा मिलने के एक महीने बाद छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद छात्र के पैरेंट्स मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर थी।

प्रोफेसर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने तर्क दिया कि कक्षा में कथित तौर पर किया गया अपमान आत्महत्या से एक महीने पहले हुआ था। लिहाजा इसे मौत का तात्कालिक या सीधा कारण (Proximate Cause) नहीं माना जा सकता। इसके बजाय, वरिष्ठ वकील ने छात्र की मौत से ठीक एक घंटे पहले हुई एक घटना की ओर इशारा किया जिसमें छात्र ने कथित तौर पर एक ऐप से लोन लिया था, बिना अनुमति के उसने एक प्रोफेसर का नाम गारंटर के रूप में इस्तेमाल किया था, और लोन रिकवरी एजेंट उसे परेशान कर रहे थे। सख्त शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के प्रति आगाह करते हुए वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि एक शिक्षक कभी-कभी छात्र के हित में बहुत अधिक सख्त हो सकता है और इस तरह के आचरण पर मुकदमा चलाने से उन शिक्षकों पर ‘बुरा असर’ पड़ेगा जो अनुशासन लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि समय बदल गया है. शायद हमारे दिनों में पिटाई करना आम बात थी… अब चीजें बदल गई हैं। जस्टिस मेहता ने कहा कि यदि किसी छात्र को कक्षा में उसके सहपाठियों के सामने अपमानित किया जाता है, तो छात्र के मानस (Psyche) पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। समाज में ये संदेश जाना ही चाहिए कि शिक्षक छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते।

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