कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर के दादर क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक घर के अंदर एक साथ दो अत्यंत विषैले अहिराज सांप दिखाई दिए। घर में दो खतरनाक सांपों को देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए। घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग और वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम नोवा नेचर को दी गई। सूचना मिलते ही टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान पता चला कि दोनों सांप प्रजनन अवस्था में थे। ऐसे में उन्हें जबरन अलग करना खतरनाक हो सकता था। रेस्क्यू टीम ने सावधानी बरतते हुए करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार किया और दोनों सांपों के अलग होने के बाद सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगल में छोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार, घटना रात करीब 8:30 बजे की है। दादर क्षेत्र स्थित एक मकान में परिवार के सदस्यों को अचानक दो बड़े सांप दिखाई दिए। दोनों सांप एक साथ होने के कारण परिवार के लोग भयभीत हो गए। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए परिजनों ने समझदारी दिखाते हुए सांपों के पास जाने या उन्हें भगाने की कोशिश नहीं की। इसके बजाय तत्काल वन विभाग और नोवा नेचर रेस्क्यू टीम से संपर्क किया गया। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम के प्रमुख जितेंद्र सारथी मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों सांपों की स्थिति का निरीक्षण किया और परिवार के सदस्यों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी।
रेस्क्यू टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी ने बताया कि दोनों अहिराज सांप प्रजनन अवस्था में थे। इस दौरान उन्हें जबरन अलग करने की कोशिश जोखिम भरी हो सकती थी। इसलिए टीम ने तत्काल पकड़ने के बजाय उनके प्राकृतिक रूप से अलग होने का इंतजार करने का फैसला लिया। इस दौरान परिवार के लोगों को सांपों से दूर रखा गया और आसपास की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। करीब डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद नर और मादा सांप अपने आप अलग हो गए। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने विशेष सावधानी बरतते हुए दोनों को एक-एक कर सुरक्षित पकड़ लिया। सांपों को सुरक्षित डिब्बों में रखने के बाद वन विभाग के उच्च अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद दोनों अहिराज सांपों को आबादी वाले क्षेत्र से दूर उनके प्राकृतिक आवास यानी घने जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
जितेंद्र सारथी ने बताया कि अहिराज सांप को अंग्रेजी में Banded Krait कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Bungarus fasciatus है। यह भारत में पाए जाने वाले अत्यंत विषैले सांपों में शामिल है। इसकी पहचान शरीर पर मौजूद चमकदार काली और पीली पट्टियों से होती है। अहिराज सांप मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय रहता है। यह सामान्य परिस्थितियों में इंसानों के संपर्क से बचने की कोशिश करता है। हालांकि, खतरा महसूस होने या छेड़े जाने की स्थिति में इसके काटने का जोखिम रहता है। इसका जहर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए इस प्रजाति के सांप को देखकर विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
रेस्क्यू टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराने की जरूरत नहीं है। किसी भी सांप को मारने, छेड़ने या खुद पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सांपों के रेस्क्यू के दौरान धैर्य और सही तकनीक का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। खासकर प्रजनन अवस्था में मौजूद सांपों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ इंसानों और वन्यजीवों दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सांप दिखने पर तत्काल प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
दादर क्षेत्र में हुए इस रेस्क्यू ऑपरेशन में टीम की सतर्कता और धैर्य के कारण दोनों अहिराज सांपों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं, परिवार के सदस्यों को भी किसी तरह की चोट नहीं पहुंची। इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की अहमियत को सामने रखा है। रेस्क्यू टीम ने लोगों से वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने और सांप दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है।

