जैन बगीचे में चातुर्मासिक प्रवचन, आत्मचिंतन और समय के सदुपयोग का दिया संदेश
राजनांदगांव(दैनिक पहुना)। खरतरगच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य मुनि मौलिकप्रभ सागर जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल समय बिताने के लिए नहीं, बल्कि आत्मकल्याण के लिए मिला है। यदि हम समय को यूं ही बर्बाद करते रहे, तो एक दिन ऐसा आएगा जब हमारे पास कुछ करने का अवसर ही नहीं बचेगा। इसलिए समय का सदुपयोग करते हुए आत्मचिंतन करना जरूरी है।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि जैन बगीचे स्थित ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर स्वच्छ सोच और सकारात्मक ऊर्जा होनी चाहिए। आज हम यह विचार ही नहीं करते कि जीवन में हमारा उद्देश्य क्या है और हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यदि प्रतिदिन केवल पांच मिनट भी अपनी आत्मा के लिए निकालें, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
मुनि श्री ने कहा कि संसार में व्यक्ति को अपने कर्मों का फल स्वयं भोगना पड़ता है। पत्नी, बेटे-बेटी या अन्य रिश्तेदार कोई भी उसके पापों को नहीं धो सकता। संसार से विदा होने के बाद सांसारिक संबंध भी पीछे छूट जाते हैं। इसलिए बाहरी मोह-माया में उलझने के बजाय स्वयं के बारे में विचार करना चाहिए। यह शरीर क्षणभंगुर है, ऐसे में जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मोह और लोभ का बंधन मनुष्य को लंबे समय से जकड़े हुए है। जिन रिश्तों और वस्तुओं के लिए व्यक्ति जीवनभर प्रयास करता है, वे अंततः यहीं छूट जाते हैं। इसलिए अभी भी समय है कि व्यक्ति अपनी आत्मा के कल्याण के लिए समय निकाले, आत्मचिंतन करे और जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करे।

