बंगाल का ‘सीएम’ कौन? आज होगा फैसला, अमित शाह की विधायकों संग बड़ी बैठक

Bengal New CM: बंगाल का ‘बॉस’ कौन? इसका फैसला आज होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की अध्यक्षता में होने वाली बंगाल बीजेपी विधायक दल की बैठक (Bengal BJP Legislature Party meeting) में इसका फैसला होगा। बैठक में जिसे विधायक दल का नेता चुना जाएगा वो ही बंगाल का अगला बॉस होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल के पर्यवेक्षक के तौर पर कोलकाता में बंगाल के नए सीएम के नाम का ऐलान करेंगे।

आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में जीतकर आई बीजेपी सरकार बनने जा रही है। बंगाल बीजेपी विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री से लेकर नए मंत्रिमंडल और सरकार का फॉर्मूल तय होगा। सीएम की रेस में कई नाम चल रहे हैं, जिसमें शुभेंदु अधिकारी से लेकर रुपा गांगुली और अग्निमित्रा पॉल सहित आधा दर्जन नाम है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बंगाल के पर्यवेक्षक के तौर पर आज यानी शुक्रवार को कोलकाता में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक करेंगे। शाह के साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी सह-पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे। बीजेपी के चुने गए सभी 207 विधायकों के साथ अमित शाह बातचीत करेंगे। बीजेपी के वरिष्ठ नेता द्वारा विधायक दल के नेता का नाम प्रस्तावित कराया जाएगा। सभी विधायकों की रजामंदी के बाद बीजेपी विधायक दल के नेता का नाम फाइनल  होने के साथ अधिकारिक तौर पर सार्वजानिक कर दिया जाएगा। ये नेता ही 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

मुख्यमंत्री पद की रेस में कौन-कौन नेता शामिल

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी के कई नेताओं के नाम चल रहे हैं। बंगाल की सीएम की रेस में सबसे आगे ममता बनर्जी को करारी शिकस्त देने वाले सुवेंदु अधिकारी सबसे आगे चल रहे हैं। सुवेंदु लगातार दो चुनाव में सीएम ममता बनर्जी को हरा चुके हैं। लिहाजा अधिकारी का पलड़ा भारी माना जा रहा है। हालांकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, वरिष्ठ नेता दिलीप घोष, विधायक अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली सहित आधा दर्जन नेताओं के नाम चल रहे हैं।

सुवेंदु अधिकारी

सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे हैं। भवानीपुर से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,114 वोटों से हराया है। सुवेंदु ने लगातार दूसरी बार ममता बनर्जी को हराया है। एक समय में ममता बनर्जी के करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी के पास जमीनी पकड़ और मजबूत सांगठनिक नेटवर्क है। 2021 में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर ‘जायंट किलर’ का तमगा हासिल किया था।

अग्निमित्रा पॉल

पेशे से फैशन डिजाइनर अग्निमित्रा पॉल बीजेपी की एक बेबाक नेताओं में से एक हैं। उन्होंने इस चुनाव में अपनी आसनसोल दक्षिण सीट बरकरार रखी है। अगर बीजेपी राज्य में महिला सीएम चुनती है तो अग्निमित्रा उनकी पसंद हो सकती हैं।

रूपा गांगुली

पूर्व राज्यसभा सांसद और सोनारपुर दक्षिण से विधायक रूपा गांगुली ने महिला मोर्चा की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जमीनी स्तर पर भी काम किया है। उनकी पॉपुलैरिटी देखते हुए बीजेपी उन्हें बंगाल का मुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर सकती है। रूपा गांगुली वहीं अदाकारा हैं, जिन्होंने बी.आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ में द्रौपदी का किरदार निभाकर घर-घर छा गई थीं।

दिलीप घोष 

बीजेपी में जो दूसरे नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है वो है दिलीप घोष का। वह भाजपा के सीनियर लीडर हैं और बंगाल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। बंगाल में उन्होंने बीजेपी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी पकड़ पार्टी में मजबूत बनी हुई है। ऐसे में पार्टी उन्हें बंगाल के नए सीएम की जिम्मेदारी सौंप सकती है।

समिक भट्टाचार्य भी हैं मैदान में
बंगाल में सीएम पद के लिए बीजेपी नेता समिक भट्टाचार्य भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे पश्चिम बंगाल बीजेपी के राज्य अध्यक्ष हैं बंगाल में बीजेपी के लिए मजबूत जमीन बनाने का श्रेय उन्हें जाता हैष उन्होंने पुराने और नए कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ा। बंगाली संस्कृति को अच्छे से जानते हैं और आरएसएस से भी जुड़े हैं। ऐसे में बीजेपी के कई नेता मानते हैं कि बिना आरएसएस के समर्थन के यह बड़ी जीत संभव नहीं थी, लिहाजा इस बार सीएम पद समिक की झोली में जा सकता है।

उत्पल महाराज का नाम भी है आगे
यूपी में धार्मिक फायरब्रांड सीएम की तरह पश्चिम बंगाल की सत्ता भी ऐसे ही किसी कर्मयोगी धार्मिक नेता के पास जा सकती है। इसी वजह से उत्पल ब्रह्मचारो यानि उत्पल महाराज का भी निकलकर आ रहा है। ब्रह्मचारो का नाम आरएसएस और संगठन के अंदर काफी चर्चित है। वे धार्मिक नेता हैं। उन्होंने कालीगंज सीट से चुनाव लड़ा और 76000 से भी ज्यादा वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की।

बंगाल में मंत्रिमंडल गठन का फॉर्मूला कैसा होगा
पश्चिम बंगाल में सिर्फ सीएम का चयन नहीं करना बल्कि मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले चेहरों का भी चुनाव करना है। इसके अलावा विधानसभा के स्पीकर भी फैसला किया जाना है? बीजेपी में मंथन चल रहा है कि नई कैबिनेट को इस तरह से तैयार किया जाएगा ताकि वैचारिक प्रतिबद्धता और जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़े रखा जा सके। इसके साथ ही क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान केंद्रित रहे। बीजेपी और संघ के बीच हाल ही में हुई समन्वय बैठकों में आरएसएस ने वैचारिक एकता को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया था। पार्टी उन नेताओं उम्मीदवारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिनका संघ के साथ काम करने का लंबा इतिहास रहा है।

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