आवारा कुत्तों की किस्मत सड़क या शेल्टर हाउस? स्ट्रे डॉग्स केस में सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

आवारा कुत्तों के मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले पर फैसला सुनाएगी. कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों से एक हफ्ते में लिखित दलीलें जमा करने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट आज आवारा कुत्तों मामले में अहम फैसला सुनाएगा. पिछली सुनवाई के वक्त कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था.

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाने वाला है, जिनमें आवारा कुत्तों के मामले में 11 अगस्त के पिछले आदेशों में बदलाव करने का निर्देश देने की मांग की गई है. कोर्ट की एक बेंच ने 29 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस विक्रम नाथ कर रहे हैं.

याचिकाकर्ताओं, प्रतिवादियों, भारत सरकार, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI), कुत्तों से प्यार करने वाले लोगों, कुत्तों के काटने से पीड़ित लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, केंद्र और राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद, यह बेंच मंगलवार, 19 मई यानी आज अपना फैसला सुनाएगी.

फैसला सुरक्षित रखते वक्त, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) से कहा था कि वह स्थानीय संगठनों द्वारा दायर उन आवेदनों पर तेज़ी से फ़ैसला ले, जिनमें नसबंदी और अन्य पशु कल्याण कार्यक्रम चलाने के लिए मान्यता मांगी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 जुलाई को इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था.

पिछले साल 11 अगस्त को जस्टिस जेबी परदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को आदेश दिया कि वे सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजें. कोर्ट ने ये भी कहा था कि कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए. इस काम में रुकावट डालने वालों पर अदालती कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी.

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की दो-जजों की बेंच ने कहा, हम यह अपने लिए नहीं, बल्कि जनहित में कर रहे हैं. इसलिए, इसमें किसी भी तरह की भावनाएं शामिल नहीं होनी चाहिए. जल्द से जल्द कार्रवाई की जानी चाहिए.

बाद में, कई लोगों ने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी और इसे रद्द करने या इसमें कई बदलाव करने की मांग की.

कोर्ट ने 22 अगस्त को मुख्य रूप से अपने पिछले आदेश को पलट दिया. पिछले आदेश में अधिकारियों को सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया गया था, लेकिन नए आदेश में कोर्ट ने कहा गया कि उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद, कुत्तों को उसी इलाके में वापस छोड़ा जा सकता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था, सिवाय उन कुत्तों के जिन्हें रेबीज़ है या जो आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं. कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगा दी.

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