भारत में बदल सकते हैं इंटरनेट के नियम! अब अलग-अलग ऐप और स्पीड के लिए देना होगा अलग चार्ज

Technology Desk – देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने के नियमों में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार कई साल पुराने नेट न्यूट्रैलिटी (Net Neutrality) नियमों की समीक्षा करने की तैयारी में है। अगर नए नियम लागू होते हैं, तो भविष्य में टेलीकॉम कंपनियां इंटरनेट की अलग-अलग स्पीड और खास सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क ले सकेंगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने इस मामले पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि 5G तकनीक और नई डिजिटल सेवाओं को देखते हुए मौजूदा नियमों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

क्या बदल सकता है?

अगर सरकार नए नियमों को मंजूरी देती है, तो Jio, Airtel और Vi जैसी टेलीकॉम कंपनियां इंटरनेट की अलग-अलग कैटेगरी की सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लान या शुल्क तय कर सकती हैं।

उदाहरण के तौर पर भविष्य में हाई-स्पीड गेमिंग, 4K वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन हेल्थ सर्विस, स्मार्ट फैक्ट्री, ऑटोनॉमस व्हीकल या अन्य प्रीमियम सेवाओं के लिए अलग इंटरनेट पैकेज या अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

टीवीऔर वीडियो डिवाइस

यानी जिस तरह आज मोबाइल डेटा प्लान अलग-अलग होते हैं, उसी तरह भविष्य में इंटरनेट सेवाएं भी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं।

आखिर क्या है नेट न्यूट्रैलिटी?

नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इंटरनेट पर मौजूद हर वेबसाइट, ऐप और ऑनलाइन सेवा के साथ समान व्यवहार किया जाए।

इस नियम के तहत इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियां किसी एक ऐप या वेबसाइट को दूसरी के मुकाबले ज्यादा स्पीड या प्राथमिकता नहीं दे सकतीं। वे किसी ऐप की स्पीड जानबूझकर कम नहीं कर सकतीं और न ही किसी कंपनी से अतिरिक्त पैसा लेकर उसके कंटेंट को “फास्ट लेन” में भेज सकती हैं। यानी अभी तक हर इंटरनेट यूजर और हर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए एक जैसे नियम लागू हैं।

सरकार क्यों कर रही है नियमों की समीक्षा?

साल 2022 में भारत में 5G सेवाएं शुरू होने के बाद इंटरनेट तकनीक में बड़ा बदलाव आया है। अब 5G Network Slicing जैसी तकनीक उपलब्ध है, जिससे एक ही नेटवर्क पर अलग-अलग तरह की सेवाओं के लिए अलग-अलग गुणवत्ता की इंटरनेट सुविधा दी जा सकती है।

सरकार का मानना है कि मौजूदा नेट न्यूट्रैलिटी नियम इस नई तकनीक के अनुरूप नहीं हैं। इसी वजह से यह देखा जा रहा है कि क्या पुराने नियमों में बदलाव की जरूरत है।

क्या है 5G Network Slicing?

5G नेटवर्क स्लाइसिंग ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही 5G नेटवर्क को कई हिस्सों (Slices) में बांट दिया जाता है। हर हिस्से को अलग-अलग जरूरत के हिसाब से तैयार किया जा सकता है। उदाहरण के लिए-

ऑनलाइन गेमिंग के लिए कम लेटेंसी वाला नेटवर्क
अस्पतालों की डिजिटल सेवाओं के लिए ज्यादा भरोसेमंद कनेक्शन
स्मार्ट फैक्ट्री के लिए हाई-स्पीड और स्थिर इंटरनेट
वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए अलग नेटवर्क क्षमता

इससे हर सेवा को उसकी जरूरत के अनुसार बेहतर इंटरनेट अनुभव मिल सकता है।

एयरटेल और जियो पहले ही बढ़ा चुके हैं कदम

रिपोर्ट के अनुसार, भारती एयरटेल अपने कुछ पोस्टपेड ग्राहकों के लिए 5G Network Slicing आधारित सेवा शुरू कर चुकी है। इसमें बेहतर स्पीड और कम लेटेंसी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। फिलहाल इस सेवा की जांच दूरसंचार विभाग (DoT) और TRAI कर रहे हैं।

वहीं रिलायंस जियो ने भी घनी आबादी वाले शहरों में नेटवर्क क्षमता और कवरेज बेहतर बनाने के लिए 5G Network Slicing तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना का ऐलान किया है।

दूसरे देशों में भी हो रहा इस्तेमाल

भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जहां इस तकनीक पर काम हो रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया और चीन जैसे कई देशों में 5G Network Slicing का इस्तेमाल अलग-अलग उद्योगों और प्रीमियम इंटरनेट सेवाओं के लिए किया जा रहा है।

अगर भारत में भी नेट न्यूट्रैलिटी नियमों में बदलाव होता है, तो आने वाले समय में इंटरनेट सेवाओं का ढांचा मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग दिखाई दे सकता है।

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