फॉर्म-6 में बदलाव पर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब….

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर निर्वाचन आयोग से सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा कि इस बदलाव का आदेश आयोग में किस अधिकारी ने दिया था। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि बदलाव को लागू करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS में किस अधिकारी ने मंजूरी दी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या TCS पर ऐसा करने के लिए किसी तरह का दबाव था।

फॉर्म-6 को लेकर क्या बोले राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म-6 में हुए बदलाव को लेकर सवाल खड़े किए और निर्वाचन आयोग से संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा। उनका सवाल था कि आयोग में किस व्यक्ति ने TCS को फॉर्म में बदलाव करने का निर्देश दिया और कंपनी में किस अधिकारी ने इस बदलाव को मंजूरी दी।

राहुल गांधी ने अपने बयान में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का भी जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि कंपनी के भीतर किस अधिकारी ने इस बदलाव पर हस्ताक्षर करके इसे मंजूरी दी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या TCS के अधिकारियों पर इस बदलाव को लागू करने के लिए किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था।

फॉर्म-6 में क्या मामला सामने आया?

फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। इस पूरे विवाद का संबंध विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान फॉर्म के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा से है।इस अतिरिक्त घोषणा में नए आवेदकों से उनके या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।

निर्वाचन आयोग ने क्या कहा?

निर्वाचन आयोग ने कहा है कि मूल वैधानिक फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था। आयोग के अनुसार, SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई है। जहां SIR अभी जारी है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा बनी हुई है। इस तरह इस मामले में राहुल गांधी ने बदलाव के आदेश और TCS की मंजूरी से जुड़े सवाल उठाए हैं, जबकि निर्वाचन आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म-6 में संशोधन नहीं हुआ था और अतिरिक्त घोषणा SIR से जुड़ी व्यवस्था के तहत जोड़ी गई थी।

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