छत्तीसगढ़ के इस जिले में मिला 300 साल पुराना खजाना! जंगलों में छिपी दुर्लभ पांडुलिपियां

महासमुंद।  300 वर्ष से अधिक पुरानी दुर्लभ एवं बहुमूल्य पांडुलिपियाँ प्राचीनतम ज्ञान की ऐतिहासिक धरोहर हैं , जिन्हे अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा लांच की गई ” ज्ञान भारतम ऐप ” के माध्यम से संरक्षित एवं डिजिटलीकरण किया जा रहा है । महासमुंद जिला ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध माना जाता है।

ज़िले 300 वर्ष से भी अधिक पुरानी पांडुलिपियों की खोज

महासमुंद जिले मे जहाँ हजारों वर्ष पुरानी वैभव शाली सभ्यता के प्रमाण पुरातात्विक स्थल सिरपुर मे मिलते हैं, वहीं अब दुर्लभ पांडुलिपियों के सर्वेक्षण मे महासमुंद जिले को छत्तीसगढ़ मे सर्वाधिक पांडुलिपि वाला जिला घोषित किया गया है। Gyan Bharatam App वर्तमान मे जिले मे 300 वर्ष से भी अधिक पुरानी पांडुलिपियों की खोज की जा चुकी है ।विशेष रूप से दूरस्थ जंगलों के बीच बसे अंचल मे जनजातीय समुदायों के पास दुर्लभ पांडुलिपियाँ सहेज कर रखी गई हैं।

ताड़पत्र पर लिखी गई हैं पांडुलिपियाँ

यह पांडुलिपियाँ अधिकतर ताड़पत्र पर लिखी गई हैं। जिनमे उड़िया लिपि का प्रयोग हुआ है। सैंकड़ों वर्ष पुराने इन पांडुलिपियों मे भागवत पुराण, लक्ष्मी पुराण , दुर्गा ग्रंथ , ज्योतिष ज्ञान , जनजातीय धार्मिक संस्कार पद्धति, जादू-टोना, भूत पिशाच निवारण, जड़ी-बूटी औषधि, पशु चिकित्सा , बाण विद्या एवं इतिहास से संबंधित विषय शामिल हैं।

गौरतलब है कि बागबाहरा ब्लाक के दूरस्थ एवं घोर जंगल के बीच बसे गांवों मे दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज हुई है। जनजातीय आदिवासी परिवारों के पास सैंकड़ों सालों से सुरक्षित पांडुलिपियों का आज भी धार्मिक , सामाजिक , चिकित्सा एवं तंत्र मंत्र मे उपयोग हो रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!