Supreme Court Hearing On Gyanesh Kumar And SIR: मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) और ज्ञानेश कुमार के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। याचिकाओं पर आज सुनवाई होनी थी। हालांकि चुनाव आयोग के लफनामे का जवाब देने के लिए याचिकाकर्ता ने समय मांगा। इसके बाद देश के शीर्ष न्यायालय ने 10 दिन की मोहलत दी। अब मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को सुनवाई हो सकती है।
सीईसी-एसआईआर मामले के मुख्य याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। चुनाव आयोग से भी कहा है कि वह दूसरी याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करे।
दरअसल कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और 13 विपक्षी नेताओं समेत तीन दर्जन याचिकाओं में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR, चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने के तरीके और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती दी गई है। ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में 27 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी। इस मामले में चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपने फैसलों का बचाव किया। इलेक्शन कमीशन ने कहा कि SIR से जुड़े तीनों आदेश आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज करते हुए याचिकाओं को निराधार बताया है।
फॉर्म 6 पर चुनाव आयोग को SC का नोटिस
इधर सांसद डोला सेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने फॉर्म 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह मामला ECI के कामकाज से जुड़ा है, जिसमें ऑनलाइन ‘फॉर्म 6’ के साथ छेड़छाड़ करना और ECI का एक प्रेस नोट जारी करना शामिल है। इस प्रेस नोट में कहा गया है कि आपकी पीठ (अदालत) ने ऐसी छेड़छाड़ को अधिकृत किया है। इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम इसकी जांच करेंगे। CJI ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं. इसके बाद गुरुस्वामी ने कहा कि चुनाव आयोग फॉर्म के साथ की गई छेड़छाड़ को ही सही ठहरा रहा है। ECI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि यह किसी और मकसद से की जा रही है, इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
इधर चुनाव आयोग भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई से एक दिन पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर हलफनामा दायर किया। चुनाव आयोग (election Commission) ने कहा कि हमने SIR के फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया। नियमों के अनुसार इस पर बदलाव का अधिकार केंद्र के पास है। आयोग ने कहा कि SIR पर सभी फैसले भी सर्वसम्मति से लिए गए थे। फैसलों पर CEC ज्ञानेश कुमार, कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी तीनों की सहमति थी। कोर्ट में दाखिल एफिडेविट पर भी तीनों के दस्तखत हैं।
दरअसल SIR पर यह विवाद तब शुरू हुआ जब अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट प्रकाशित किया कि फॉर्म- 6 में हुए बदलाव की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दो अन्य़ चुनाव आयुक्तों को नहीं दी थी। अखबार के मुताबिक फॉर्म- 6 में हुए बदलाव की दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी, जिनके तहत आवेदकों को खुद को, अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली SIR से जोड़ने वाले डिटेल देने के लिए कहा गया था। हालांकि ECI ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर जिस तरह से इसे दिखाया गया था, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म 6 में बदलाव किया गया है।आयोग ने कहा कि याचिका एक रिपोर्ट पर आधारित है, और कानून की नजर में अखबार की रिपोर्ट को सबूत नहीं माना जाता है। इसलिए CEC को काम करने से नहीं रोका जा सकता।

