सर्पदंश जागरूकता की पाठशाला: ग्रामीणों को समझाइश; सांप डसे तो झाड़-फूंक में समय न गवाएं, तुरंत अस्पताल पहुंचे

मुंगेली। बरसात के समय सर्पदंश की घटना अपेक्षाकृत ज्यादा होती है, इसलिए इस समस्या से निजात पाने के लिए जिले के ग्राम दाऊकापा के सांवरा मोहल्ले में विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को इससे बचाव के लिए जागरूक किया गया।

सर्पदंश की घटना की जानकारी देते हुए डॉ. मनीष बंजारा ने बताया कि हमारे देश में लाखों लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं, और हजारों लोगों की मृत्यु हो जाती है। थोड़ी सी सावधानी रखी जाए तो लोगों को मृत्यु से बचाया जा सकता है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सर्पदंश को लेकर ग्रामीणों में व्याप्त भय, भ्रम एवं अंधविश्वास को दूर कर वैज्ञानिक एवं जीवनरक्षक जानकारी देकर उन्हें मृत्यु से बचाना है। ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में सर्पदंश एक गंभीर समस्या है। समय पर उचित उपचार न मिलने पर यह जानलेवा हो सकता है, वहीं शीघ्र चिकित्सा सहायता मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।

उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं और झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या किसी भी घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय मरीज को तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाएं।उन्होंने यह भी बताया कि अज्ञात दंश के मामले में भी मरीज को अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना चाहिए।

कुछ विषैले सर्पदंश में लक्षण प्रारंभिक समय में स्पष्ट नहीं होते, इसलिए चिकित्सक की सलाह के अनुसार निगरानी आवश्यक हो सकती है। गंभीर विषैले सर्पदंश में एंटी-स्नेक वेनम सहित समय पर उचित चिकित्सा उपचार मिलने से मृत्यु के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

विषैले एवं विषहीन सांपों की जानकारी

ग्रामीणों को प्रमुख विषैले सर्पों जैसे कोबरा, करैत, रसेल्स वाइपर एवं सॉ-स्केल्ड वाइपर के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांप की पहचान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि दंश विषैला है अथवा नहीं। इसलिए प्रत्येक सर्पदंश के मामले में चिकित्सकीय जांच के साथ इलाज अत्यंत आवश्यक है। सांप को पकड़ने या मारने के प्रयास में समय गंवाने के बजाय मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि उसके जीवन की रक्षा हो सके।

सर्पदंश में क्या करें

सर्पदंश होने पर मरीज को शांत रखें और अनावश्यक चलने-फिरने से रोकें, प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें, अंगूठी, चूड़ी, कड़ा, जूते या अन्य कसने वाली वस्तुएं हटा दें, मरीज को बिना देरी किए निकटतम स्वास्थ्य संस्था ले जाएं। संभव हो तो सुरक्षित दूरी से सांप की फोटो लेकर चिकित्सक को दिखा सकते हैं, लेकिन सांप को पकड़ने या मारने का प्रयास न करें।

सर्पदंश में क्या नहीं करें

उन्होंने ग्रामीणों को विशेष रूप से समझाया कि सर्पदंश के बाद घाव को काटना या चीरना, मुंह से जहर चूसना, कसकर रस्सी बांधना, घाव को जलाना, जड़ी-बूटी या रसायन लगाना तथा झाड़-फूंक में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है।

इलाज में देरी न करें

डॉ. बंजारा ने कहा कि सर्पदंश में कोई निश्चित “एक घंटे” की कठोर समय-सीमा मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए। मरीज को जितनी जल्दी संभव हो, उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना ही सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि बचाव के लिए इलाज आरंभ हो सके।

उन्होंने बताया कि कोबरा एवं करैत जैसे न्यूरोटॉक्सिक सर्पदंश में पलक गिरना, बोलने या निगलने में कठिनाई, आवाज में बदलाव और सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है।

रसेल्स वाइपर एवं सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे हीमोटॉक्सिक सर्पदंश में मसूड़ों व नाक से रक्तस्त्राव, पेशाब में खून का आना, चक्कर, गंभीर स्थिति में किडनी को नुकसान पहुंचता है।

सांप दुश्मन नहीं, पर्यावरण के प्रहरी हैं

सांप प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे चूहों एवं अन्य जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, इसलिए सांपों के प्रति अनावश्यक भय और नफरत के बजाय सावधानी, समझ और संरक्षण की भावना विकसित करना जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान सांवरा समुदाय के लोगों ने सर्पदंश से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से समाधान किया गया। ग्रामीणों को रात में टॉर्च का उपयोग करने, घर के आसपास साफ-सफाई रखने, सोते समय विशेष सावधानी बरतने तथा मच्छरदानी का उपयोग, जमीन में सोने से बचें, बरसात के मौसम में अतिरिक्त सतर्कता रखने की सलाह दी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!