देश की हर कोर्ट में महिला वकीलों के लिए टॉयलेट-बार रूम बनेंगे: सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

Supreme Court Big Decision For Women Lawyers: देश की हर कोर्ट में महिला वकीलों के लिए टॉयलेट-बार रूम बनेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की अदालतों में महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए टॉयलेट-बार रूम बनाने का आदेश दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि यह बुनियादी हक है। इसपर कोई बहाना नहीं चलेगा। यह आदेश देश की न्याय प्रणाली में काम कर रही हजारों महिला वकीलों के लिए एक बड़ी राहत और उनके सम्मान की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है।

CJI ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और हाई कोर्ट्स को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिला, सब-डिविजनल और तालुका अदालतों में महिलाओं के लिए अलग बार रूम और वॉशरूम का निर्माण प्राथमिकता पर किया जाए। CJI ने साफ शब्दों में कहा, ‘महिलाओं के लिए बुनियादी ढांचा और सुविधाएं न होने का कोई भी बहाना या औचित्य स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में एक जैसा पैटर्न हो, महिलाओं के लिए बनने वाले टॉयलेट्स और सुविधाओं का डिजाइन व पैटर्न सभी राज्यों और जिलों में एक समान होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर तय की है, जहां सभी राज्यों को अपनी कम्प्लायंस (अनुपालन) रिपोर्ट पेश करनी होगी। सुनवाई के दौरान एमिकस ने कोर्ट को बताया कि राज्यों द्वारा दाखिल किए गए 16-17 हलफनामों में यह बात सामने आई है कि महिला वकीलों के लिए अदालतों में टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नाममात्र की हैं या हैं ही नहीं।  हरियाणा राज्य ने अभी तक इस संबंध में कोई निरीक्षण तक नहीं किया है। जबकि  पंजाब राज्य के 67 जिला अदालत परिसरों में से केवल 9 अदालतों में महिला वकीलों के लिए वॉशरूम उपलब्ध हैं। वहीं कोलकाता काउंसलिंग के दौरान एडवोकेट मनिका ने ध्यान दिलाया कि कोलकाता जैसी जगह की अदालतों में भी महिला वकीलों के लिए टॉयलेट उपलब्ध नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े और सख्त निर्देश

1. अलग और एक्सक्लूसिव सुविधाएं: जिला अदालतों, सब-डिविजनल और तालुका कोर्ट में जहां भी महिला वकील प्रैक्टिस करती हैं, वहां उनके लिए अलग और एक्सक्लूसिव ‘वीमेन बार रूम’ और वॉशरूम का निर्माण किया जाए।
2. फंड और जमीन का आवंटन: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे इसके लिए तुरंत आवश्यक फंड और जरूरत पड़ने पर जमीन आवंटित करें।
3. हाई कोर्ट की बिल्डिंग कमेटी को प्राथमिकता: सभी हाई कोर्ट्स की बिल्डिंग कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस काम को पहली प्राथमिकता पर लें और अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय को नियमित प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपें।

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